महिलाओं ने की आंवले पेड़ के नीचे बैठकर की पूजा, 108 परिक्रमा भी लगाई

कार्तिक शुक्ल की नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आंवले के पेड़ पर करते हैं वास

CG Prime news@ Bhilai. मंगलवार को आंवला नवमी पर शहरी व ग्रामीण अंचल में महिलाओं ने आंवले पेड़ के नीच बैठकर पूजा की। इसके साथ ही उसकी परिक्रमा लगाई। बता दें कि दीपावली के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर इस त्योहार को मनाया जाता है। आंवला नवमी को अक्षय नवमी भी कहा जाता है। अक्षय नवमी धात्री तथा कूष्मांडा नवमी के नाम से भी जानी जाती है।

खुर्सीपार, कोहका, भिलाई तीन और दुर्ग की महिलाओं ने आंवला पेड़ के नीचे पूजा अर्चना की। पेड़ के नीचे बैठकर छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाकर उत्सव मनाया। रश्मि पांडेय ने बताया कि इसकी पौराणिक मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आवंले के पेड़ पर निवास करते हैं। इसीलिए इस पेड़ की पूजा अर्चना की जाती है। यह भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण अपनी बाल लीलाओं का त्याग करके वृंदावन की गलियों को छोड़कर मथुरा चले गए थे। आंवला भगवान विष्णु का सबसे प्रिय फल है और आंवले के वृक्ष में सभी देवी देवताओं का निवास होता है। इसलिए इसकी पूजा का प्रचलन है।