रूंगटा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों की पहचान विदेशों में भी बनेगी… आरसीईटी के सीएस और आईटी को मिली एनबीए की मान्यता

भिलाई . नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन (एनबीए) ने रूंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की मान्यता (एक्सटेंड) बढ़ा दिया है। इसका मतलब यह है कि हमारे विद्यार्थियों को मिलने वाली डिग्री की मान्यता अब सिर्फ देश तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिलेगी। रूंगटा आर-1 इंजीनियरिंग कॉलेज के कंप्यूटर साइंस और आईटी ब्रांच को एनबीए की मान्यता दी गई है।

अब एक्रेडिटेशन साल 2028 तक मान्य रहेगा। मध्य भारत के चुनिंदा इंजीनियरिंग कॉलेजों को ही एनबीए की मान्यता है, जिसमें रूंगटा आर-१ इंजीनियरिंग एक है। एनबीए से ब्रांच एक्रेडिटेड होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नौकरियों की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती है।

सीधे तौर पर छात्रों को फायदा

देश की नामी शैक्षणिक संस्थानों को जिस तरह नैक से ग्रेड हासिल करना जरूरी है उतनी ही जरूरी एनबीए भी है। जिससे सीधे तौर पर विद्यार्थियों को फायदा होता है। कैंपस प्लेसमेंट के दौरान आई नामी मल्टीनेशनल कंपनियां एनबीए एक्रेडेट को विशेष तरजीह देती है। कुछ कंपनियों ने तो इसे अनिवार्य भी कर दिया है। बता दें कि सीएस और आईटी ब्रांच की प्रयोगशाला, अनुभवी प्रोफेसर्स, प्रोजेक्ट, रिसर्च हब जैसे दर्जनों मापदंडों को पूरा करने के बाद ही एनबीए ब्रांच को एक्रेडिटेशन देता है। इस उपलब्धि पर रूंगटा यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति संतोष रूंगटा व कुलपति डॉ. जवाहर सूरीशेट्टी ने हर्ष व्यक्त किया।

एनबीए की मान्यता क्या होती है?

एनबीए एक स्वतंत्र संस्था है जो भारत में तकनीकी पाठ्यक्रमों बीटेक, एमटेक आदि कोर्स की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के साथ उसे मान्यता देती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई प्रोग्राम शैक्षणिक और उद्योग मानकों के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाला है या नहीं। एनबीए की मान्यता दर्शाती है कि उस कॉलेज का पाठ्यक्रम, फैकल्टी, लैब्स, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि उच्च गुणवत्ता के हैं। एनबीए एकमात्र भारतीय संस्था है जो वॉशिंग्टन एकॉर्ड का हिस्सा है। इसका मतलब है कि जिन छात्रों की डिग्री एनबीए से मान्यता प्राप्त कॉलेज से है, उनको अमरीका, ब्रिटेन, ऑस्टे्रलिया और कनाडा जैसे देशों में नौकरी और आगे की पढ़ाई में आसानी होती है।