भिलाई . जवाहर नवोदय विद्यालय बोरई दुर्ग की छात्राओं ने पहली बार देश के शीर्ष संस्थान आईआईटी भिलाई में कदम रखा। कैंपस में दाखिल होते ही खुद को भी इसके काबिल बनाने की सोच दिमाग में घूमने लगी। सभी छात्राएं यहां मौजूद फैकल्टीज से आईआईटी में दाखिले का रास्ता पूछती दिखीं। मौका था आईआईटी भिलाई में मनाए गए राष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान दिवस का, जिसमें यह नवोदय विद्यालय की 50 छात्राएं शामिल होने पहुंची थी।
यहां विज्ञान ज्योति कार्यक्रम कराया गया था। छात्राओं के साथ उनकी शिक्षक तंद्रा धर भी शामिल रहीं। यहां आईआईटी की फैकल्टीज ने छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान के सभी पहलू समझाए। कार्यक्रम में आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर प्रो. राजीव प्रकाश ने कहा कि, अंतरिक्ष विज्ञान में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए यह कार्यक्रम कराया गया। इस दौरान छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई से लेकर मौजूदा नए आविष्कारों की जानकारी भी दी गई।
छात्राओं को मिली जेईई की जानकारी
आईआईटी भिलाई के सहायक प्रोफेसर और विज्ञान ज्योति कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मोहम्मद महबूब आलम और भौतिकी विभाग, खगोल विज्ञान के सहायक प्रोफेसर डॉ. महावीर शर्मा ने कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद स्कूल की छात्राओं और विज्ञान ज्योति कार्यक्रम के समन्वयकों ने बीटेक छात्रों के साथ उनका इंट्रेक्शन कराया। इसमें छात्राओं ने फैकल्टी और छात्रों ने जेईई से संबंधित सवाल भी पूछे। आईआईटी भिलाई के स्पेस एक्सप्लोरेशन सोसाइटी (एसईएस) के सदस्यों ने अंतरिक्ष विज्ञान से परिचित कराया। इस दौरान भारतीय अंतरिक्ष संस्थान इसरो और चंद्रयान के सरीखे तमाम उपलब्धियों की जानकारी भी दी गई। छात्राओं को जानकारी देने के लिए डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।
दूरबीन से देखा आसमान
इसके बाद छात्रों को दूरबीनों पर व्यावहारिक अनुभव दिया गया और अंतरिक्ष अवलोकनों से परिचित कराया गया। छात्राओं ने आईआईटी की लैब का भी अवलोकन किया। यहां उन्होंने एनएमआर, टीईएम और लिथोग्राफी जैसे उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों के बारे में जाना। डॉ. आलम और डॉ. शर्मा ने इस तरह के कार्यक्रमों को छात्राओं के लिए बेहद जरूरी बताया। बता दें कि अब आईआईटी भिलाई भी अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कई रिसर्च कर रहा है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहना भी मिल चुकी है।

