Big Breaking: मच्छरदानी के अंदर से रात 3 बजे रसैल वाइपर सांप का रेस्क्यू कर बचाई महिला और बच्चे की जान, परिवार में दहशत का माहौल

– नोवा नेचर के सदस्य अजय कुमार ने बड़ी सतर्कता से पकड़ा

भिलाई@CG Prime News. कोहका साकेत नगर में रहने वाले नामदेव नारखेड़े के घर में एक अनहोनी घटना होते होते बची गई. आधी रात में उनकी बेटी प्रीति पाटील और नाती पीयूष के रूम से आवाज आई. पलंग पर मच्छरदानी के अंदर सांप है. यह सुनकर पूरे परिवार में हड़कंप मत गया. नोवा नेचर संस्था के सदस्य मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू कर जहरीला सांप को पकड़ा गया.

नामदेव नारखेड़े की बेटी प्रीति पाटील ने बताया कि जब वे नींद में थी तो उन्हें लगा की बच्चे ने गुब्बारा फुला कर रखा है, जिसमें से हवा निकल रही है. थोड़ी देर में सुरसुराने की आवाज आई. नींद में ही उस और हाथ बढ़ाकर गुब्बारे को पकड़ने की कोशिश की ताकि गुब्बारे की हवा बंद कर सके. जब उन्होंने गुब्बारे सोच सांप को पकड़ा तो गुदगुदाहट लगी. नींद खूली देखें तो उन्हें अपने हाथ में सांप दिखा. उन्हें देखते ही सांप जोरो से फुफकारने लगा. पलंग में मच्छरदानी लगी हुई थी. लेकिन यहां तो मच्छरदानी के अंदर सांप घुस आया.

प्रीति की सूझबूझ से बची जान

प्रीति पाटील ने सबसे पहले अपने बेटे को नींद में अपनी ओर खींचते हुए कोने में पलंग पर बैठ गए. सांप पलंग पर मच्छरदानी के अंदर किस और तेजी से गया वह दिखाई नहीं दिया, लेकिन वह मच्छरदानी के अंदर ही था. प्रीती पाटील ने अपने पापा को आवाज लगाई और सांप पकड़ने वाले को बुलाने को कहा रात के 2:45 बजे अपने भतीजे संदीप नारखेड़े को फोन कर सूचना दी. कोई पहचान में हो जो सांप पकड़ सके.

आधी रात को सूचना मिलने पर 15 मिनट में पहुंचे नोवा नेचर के सदस्य

संदीप ने नोवा नेचर के सक्रिय सदस्य अजय कुमार को फोन लगाया. अजय आधी रात को 15 मिनट के अंदर रेस्क्यू की जगह पहुंच गए. प्रीति पाटील और पीयूष को मच्छरदानी के अंदर से बाहर निकाला. फिर अजय ने मच्छरदानी को हिलाया और पलंग में पड़े गद्दे को पलट के देखा, लेकिन सांप दिखाई नहीं दिया. अच्छी तरह मच्छरदानी को देखने के बाद गद्दे में दबे मच्छरदानी के भाग में सांप छुपा था. उसे पकड़कर बाहर निकाला. तब जाकर प्रीति और बच्चे की जान बची.

रसैल वाइपर बहुत ही जहरीला सांप है

अजय ने बताया यह सांप रसैल वाइपर है, जो अत्यधिक विषैला होता है. यह सांप गर्मी के मौसम में नहीं निकलता. ज्यादातर ठंडी के मौसम में निकलता है. इस मौसम में यह सांप देख कर थोड़ा अचंभा लगा. मच्छरदानी के अंदर से रसैल वाईपर का सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया गया, लेकिन जब सांप के घर के अंदर घुसने का रास्ता देखा गया तो कुछ समझ नहीं आया. सांप आया कहां से है जब घर के पीछे खुले प्लॉट की तरफ देखा गया तो वहां घने घने झाड़ियां दिखी. जहां से आने की पूरी आशंका हुई. सांप का रेस्क्यू करने के बाद नोवा नेचर के सदस्य अजय कुमार ने वनविभाग दुर्ग के माध्यम से राजनांदगांव के जंगल में रसैल वाईपर को सुरक्षित छोड़ा दिया.

रसेैल वाईपर को हिंदी में घोड़स और छत्तीसगढ़ी भाषा में जुड़ामहामंडल कहते है
अजय ने बताया कि रसैल वाईपर जिसे हिंदी में घोड़स और छत्तीसगढ़ी भाषा में जुड़ामहामंडल के नाम से जानते हैं. इस सांप का सिर अंग्रेजी अक्षर के वी आकार का दिखाई देता है. बड़े नथुने, भुरि या पीली पीठ जिस पर स्पष्ट काले अंडाकार आकार में धब्बे होते हैं. इस सांप को छेड़ने पर प्रेशर कुकर की तरह बहुत जोर से फुंफकारता है. जब कोई चारा नहीं बचता तब ही काटता है. सांप निशाचर, खुले घास के मैदानों, पथरीली पहाड़ियों, घने कांटेदार बाड़ो के निकट रहता है.

हिमोटॉक्सिक जहर से खून की नलियों को कर देता है पंचर

अजय ने बताया कि इसमें हिमोटॉक्सिक जहर होता है, जिसके काटने से खून की नलियां जगह-जगह पंक्चर हो जाती है. सबसे पहले इसका असर नाजुक अंगों किडनी, दिल, व फेफड़े की खून की नलियों पर पड़ता है. समय रहते अगर नजदीक के अस्पताल में जहां एंटी वेनम की व्यवस्था हो वहां इलाज करा जाए तो सर्पदंश में बचा जा सकता है. ऐसी परेशानी में नोवा नेचर रेस्क्यू नंबर अजय कुमार 9753807733, एम सूरज 9993454757, मोईज़ अहमद 9303345640 के मोबाइल नम्बर पर संपर्क कर सकते है.



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