@Dakshi sahu Rao
CG Prime News@जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के नारायणपुर के रहने वाले पद्मश्री वैद्यराज हेमचंद्र मांझी ने पद्मश्री सम्मान लौटाने का फैसला किया है। नक्सलियों की आए दिन धमकी और झूठे आरोपों से तंग आकर उन्होंने यह फैसला लिया है। दरअसल नक्सलियों ने उन पर निको माइंस में दलाली करने का आरोप लगाकर जान से मारने की धमकी दी है। जिसके बाद गृह विभाग ने वैद्यराज को वाय कैटेगरी की सुरक्षा देने का आदेश दिया है। बता दें कि पद्मश्री मांझी नक्सलियों के डर के चलते करीब 6 माह से गांव छोड़कर शहर में रह रहे हैं। नक्सलियों से जान के खतरे को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने वैद्यराज को जिला मुख्यालय स्थित सेफ हाउस में सुरक्षा दी है।

भतीजे की पहले ही कर चुके हैं हत्या
नक्सलियों ने छोटे डोंगर थाना क्षेत्र में जमकर उत्पात मचाया है। जानकारी के मुताबिक, ग्राम गौरदंड और चमेली गांव में रात करीब 12 बजे बीएसएनएल के टावरों में नक्सलियों ने आग लगा दी है। नक्सली बैनर और पोस्टर फेंक कर गए हैं। इस पर पद्मश्री मांझी को देश से मार भगाने की बात कही है। इससे पहले नक्सली उनके भतीजे कोमल मांझी की भी हत्या कर चुके हैं।
मिली सुरक्षा
नक्सलियों से धमकी के बाद हेमचंद माझी को वाय श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। गृह विभाग की ओर से इसका आदेश जारी हो गया है। जिसके मुताबिक छत्तीसगढ़ शासन हेमचंद मांझी को वाय श्रेणी की सुरक्षा दी जा रही है। राज्य शासन द्वारा प्रोटेक्शन रिव्यू गु्रप की बैठक में यह फैसला लिया गया है।
सरकार कुछ नहीं करेगी तो सम्मान लौटा दूंगा
मांझी ने कहा कि, बार-बार पर्चा फेंककर धमकी देना ये बेइज्जती जैसा करना ठीक नहीं है। हम लोग खुद कमाकर खाने वाले लोग हैं। अभी भी हमारे यहां 20-22 लोग काम करते हैं। हमारी सुरक्षा के लिए प्रशासन ने 3-4 गार्ड दिया है। मेरे छोटे डोंगर के मकान को बना दें, सुरक्षा दें, मैं वहीं जाकर रहूंगा। उन्होंने कहा कि, सरकार कुछ नहीं करेगी तो सम्मान रखकर क्या करूंगा, उसे वापस कर दूंगा। जनसेवा करता हूं, किसी का पैसा नहीं खाते हैं।
मिला है पद्मश्री पुरस्कार
हेमचंद मांझी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों पद्मश्री सम्मान मिला था। नारायणपुर जिले के रहने वाले हेमचंद्र मांझी वैद्यराज के नाम से प्रसिद्ध हैं। वह पारंपरिक तरीके से जंगली जड़ी-बूटियों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज करते हैं। मांझी ने अपना पूरा जीवन जड़ी-बूटियों की खोज और उनसे लोगों का इलाज करने में बिताया। लगभग पांच दशकों तक उन्होंने हजारों लोगों को ठीक किया है।

