Sunday, May 17, 2026
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बिहार के नालंदा के शीतला माता मंदिर में भगदड़, 9 लोगों की मौत

हादसे के बाद मंदिर और मेला बंद

by Dakshi Sahu Rao
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CG Prime News@दिल्ली. Stampede at Sheetla Mata Temple in Nalanda Bihar 9 dead बिहार में नालंदा जिले में मंगलवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। यहां के शीतला माता मंदिर में भगदड़ मच गई। जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार 8 महिलाओं की भीड़ में दबने से मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं एक पुरुष ने अस्पताल में दम तोड़ा।

मृतकों के आश्रितों को 6 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की

हादसे के बाद पटना कमिश्नर को बिहार शरीफ भेजा गया है। सीएम ने मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए हैं। दीपनगर थाने के SHO राजमणि को सस्पेंड कर दिया गया है। सरकार ने मृतकों के आश्रितों को 6 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। वही केंद्र सरकार ने 2 लाख के मुआवजे की घोषणा की है।

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बिहार के नालंदा के शीतला माता मंदिर में भगदड़, 9 लोगों की मौत

हादसे के बाद मंदिर और मेला बंद

चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचे थे। वहां मेला भी लगा था। दर्शन करने की जल्दी में धक्का-मुक्की मच गई। अफरा-तफरी के बीच कई लोग भीड़ में दब गए। बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। हादसे के बाद मंदिर और मेला को बंद करवा दिया है। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।

जुटी थी 25 हजार की भीड़

आज नालंदा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति शामिल हुईं। उनकी सुरक्षा में 8 जिलों के 2500 जवानों को लगाया गया था, जबकि मंदिर में जुटी 25 हजार की भीड़ के लिए एक भी पुलिस वाले की तैनाती नहीं थी।

40 मिनट बाद पहुंची एंबुलेंस

मंदिर में मौजूद एक श्रद्धालु ने बताया, ‘भगदड़ के बाद कई महिलाएं बेहोश पड़ीं थीं। कुछ दर्द से चिल्ला रहीं थीं। लोगों ने पुलिस को खबर की। पहले 2-3 पुलिस वाले पहुंचे। उनके साथ मिलकर श्रद्धालुओं ने घायल महिलाओं को किनारे लिटाया। कई बार एंबुलेंस के लिए फोन किया गया। घटना के करीबब 40 मिनट बाद पहली एंबुलेंस पहुंची और पुलिस के कुछ अफसर भी आए। इसके बाद घायलों को अस्पताल भिजवाया गया। महिलाओं को उठाते समय ही लग रहा था कि उनमें से कुछ की मौत हो गई है।

जल्दबाजी में मची भगदड़

महिला भक्तों ने बताया कि चैत्र महीने का ये आखिरी मंगलवार है। यहां मेला लगा था। भीड़ ज्यादा हो गई। मंदिर का गर्भगृह भी छोटा है। लोग जल्दी-जल्दी दर्शन करने के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में थे। कोई लाइन में लगकर पूजा नहीं करना चाह रहा था।

 

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