Friday, May 15, 2026
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दुर्ग मेयर ने 3 अधिकारियों को बनाया बंधक, अधिकारियों ने बुलाई पुलिस

तीखे शब्दों से अधिकारियों को लगाई फटकार

by Dakshi Sahu Rao
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CG Prime News@दुर्ग. Durg Mayor Alka Baghmar Holds Three Officials Hostage दुर्ग मेयर और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच खींचतान खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। मेयर अलका बाघमार के सख्त तेवर एक तरफ प्रशासनिक गलियारें में सुर्खियां बटोर रहे हैं वहीं तीन अधिकारियों को कथित रूप से अपने केबिन में बंधक बनाने के मामले ने तुल पकड़ लिया है। मामला तब और तूल पकड़ गया जब अधिकारियों ने खुद को असहज महसूस करते हुए पुलिस को बुला लिया और दो थानों की टीम को मौके पर पहुंचना पड़ा।

अधिकारियों ने बुला ली पुलिस

मेयर के केबिन के अंदर का माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण होता देख। अधिकारी खुद को असहज महसूस कर रहे थे। इसी बीच एक अधिकारी ने किसी तरह पुलिस को सूचना दे दी। जानकारी मिलते ही एडिशनल एसपी, सीएसपी और दो थानों की पुलिस टीम नगर निगम कार्यालय पहुंची। पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को संभाला और अधिकारियों को केबिन से बाहर निकाला। इस घटना के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।

पुलिस के ये अधिकारी पहुंचे थे मौके पर

अधिकारियों की सूचना पर एएसपी सुखनंदन राठौर, सीएसपी दुर्ग हर्षित मेहर, टीआई नवीन सिंह राजपूत, टीआई राजकुमार लहरे मौेके पर पहुंचे। कमरे के अंदर से अधिकारियों को सुरक्षा के साथ बाहर निकाला।

महापौर अलका बाघमार ने दी सफाई

इस पूरे विवाद पर महापौर अलका बाघमार ने अपनी सफाई भी दी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को केवल जवाब देने के लिए बुलाया गया था और उन्होंने आगे ऐसी गलती न करने का आश्वासन भी दिया। बंधक बनाए जाने के आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज किया है। महापौर का कहना है कि वहां कोई बंधक नहीं था और पुलिस को बुलाने की घटना भी अधिकारियों की तरफ से बनाई गई स्थिति थी। उन्होंने कहा कि जब कोई बंधक था ही नहीं, तो इसे बंधक बनाना कैसे कहा जा सकता है।

भूमिपूजन कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद

दरअसल यह पूरा मामला उरला स्थित एक सरकारी स्कूल में अतिरिक्त कक्ष के भूमिपूजन कार्यक्रम से शुरू हुआ है। इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव मुख्य अतिथि थे। महापौर अलका बाघमार जब कार्यक्रम में देरी से पहुंचीं, तब तक भूमिपूजन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।

मंच पर पहुंचते ही उन्होंने अधिकारियों पर नाराजगी जताई और खुले तौर पर लापरवाही का आरोप लगाया। महापौर ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को समय पर सूचना देना अधिकारियों की जिम्मेदारी है, लेकिन अधिकारी इस जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं लेते।

तीखे शब्दों से अधिकारियों को लगाई फटकार

कार्यक्रम के दौरान महापौर ने तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिकता निभाने के बजाय अधिकारियों को अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि जो अधिकारी जिम्मेदारी से काम नहीं कर सकते, उन्हें मुफ्त में वेतन लेने का कोई अधिकार नहीं है। इस बयान के बाद कार्यक्रम का माहौल काफी तनातनी भरा हो गया था।

अगले दिन केबिन में बनाया ‘बंधक

विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। अगले दिन महापौर ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंता जे.के. मेश्राम, एसडीओ सी.के. सोने और मंडी बोर्ड के एसडीओ प्रवीण पांडे को अपने केबिन में बुलाया। महापौर ने उनसे कार्यक्रम में हुई लापरवाही का कारण पूछा और जवाब मांगते हुए उन्हें वहीं बैठाए रखा।

बाहर जाने की नहीं दी अनुमति

बताया जा रहा है कि जब अधिकारियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो महापौर ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक सही जवाब नहीं मिलेगा, तब तक कोई भी केबिन से बाहर नहीं जाएगा। चाहे देर रात ही क्यों न हो जाए। इतना ही नहीं, महापौर ने अपने गार्ड को भी निर्देश दिए कि किसी भी अधिकारी को बाहर जाने न दिया जाए। इस दौरान अधिकारियों को फोन करने के लिए भी बाहर नहीं जाने दिया गया। इसी बीच चुपके से एक अधिकारी ने पुलिस बुला लिया।

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