Tuesday, July 28, 2026
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IIT भिलाई में 600 नए छात्रों का स्वागत, डायरेक्टर बोले- एडमिशन मंजिल नहीं, सफलता की शुरुआत है

ओरिएंटेशन कार्यक्रम में छात्रों को स्टार्टअप, रिसर्च, नवाचार और ‘राष्ट्र प्रथम’ की सोच अपनाने का संदेश, चार दिवसीय स्टूडेंट मेंटरशिप प्रोग्राम से कैंपस जीवन की दी जानकारी।

by Dakshi Sahu Rao
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CG Prime News@दुर्ग. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए लगभग 600 नए छात्रों का स्वागत किया। संस्थान में नए विद्यार्थियों को कैंपस जीवन और शैक्षणिक वातावरण से परिचित कराने के उद्देश्य से 24 से 27 जुलाई तक चार दिवसीय स्टूडेंट मेंटरशिप प्रोग्राम (SMP) के तहत ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए संवादात्मक सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें संस्थान की अकादमिक व्यवस्था, रिसर्च सुविधाओं और छात्र जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई।

डायरेक्टर का संदेश: मंजिल नहीं, नई शुरुआत

ओरिएंटेशन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए IIT भिलाई के डायरेक्टर प्रो. राजीव प्रकाश ने कहा कि IIT में प्रवेश प्राप्त करना अंतिम उपलब्धि नहीं, बल्कि सफलता की लंबी यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने छात्रों से अनुशासन, मेहनत और निरंतर सीखने की भावना बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी होना चाहिए।

स्टार्टअप और नवाचार को दिया बढ़ावा

प्रो. प्रकाश ने छात्रों से सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनना चाहिए। उन्होंने ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ तकनीक आधारित समाधान विकसित करने और इनक्यूबेशन कार्यक्रमों से जुड़कर उद्यमिता को बढ़ावा देने की अपील की।


रिसर्च, कौशल विकास और कैंपस संस्कृति पर जोर

कार्यक्रम में छात्रों को रिसर्च एवं डेवलपमेंट (R&D), उभरती तकनीकों और प्रायोगिक कौशल सीखने के अवसरों की जानकारी दी गई। डायरेक्टर ने छात्रों को पढ़ाई के साथ अनुसंधान परियोजनाओं और नवाचार गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। उन्होंने हॉस्टल जीवन को व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए सहयोग, नेतृत्व और सामूहिक सीखने की संस्कृति अपनाने पर बल दिया।

 

चरित्र निर्माण और समावेशी शिक्षा पर विशेष फोकस

प्रो. राजीव प्रकाश ने कहा कि किसी भी विद्यार्थी की सबसे बड़ी पहचान उसका चरित्र और ईमानदारी होती है। उन्होंने छात्रों को सहानुभूति, नैतिक मूल्यों और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी। साथ ही स्पष्ट किया कि ज्ञान अर्जित करने में भाषा कभी बाधा नहीं बननी चाहिए और संस्थान सभी छात्रों के लिए समावेशी एवं सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

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