Monday, July 6, 2026
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शेरनी ने किसान पर किया हमला, आधे घंटे तक जबड़े में दबाए रखा हाथ

पालीताना तालुका के गरजिया गांव में लगातार दो लोगों पर हमले की कोशिश, वन विभाग की टीम शेरनी को पकड़ने में जुटी

by Dakshi Sahu Rao
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शेरनी ने किसान पर किया हमला, आधे घंटे तक जबड़े में दबाए रखा हाथ

CG Prime News@भावनगर.Lioness attacks farmer in Gujarat गुजरात के भावनगर जिले के पालीताना तालुका स्थित गरजिया गांव में सोमवार सुबह एक शेरनी ने किसान पर हमला कर दिया। हमले में किसान कालूभाई बोगभाई परमार गंभीर रूप से घायल हो गए। किसान के अनुसार शेरनी ने उन्हें जमीन पर गिराकर उनका हाथ अपने जबड़ों में दबोच लिया और करीब आधे घंटे तक नहीं छोड़ा। किसी तरह साहस और सूझबूझ दिखाते हुए उन्होंने शेरनी को खरोंचा, जिसके बाद उन्हें भागने का मौका मिला।

शेरनी ने किसान पर किया हमला, आधे घंटे तक जबड़े में दबाए रखा हाथ

शेरनी ने किसान पर किया हमला, आधे घंटे तक जबड़े में दबाए रखा हाथ

किसान ने बताया कैसे बची जान

घायल किसान कालूभाई ने बताया कि वह सुबह लगभग 10:30 बजे अपनी गाय को चारा खिलाने जा रहे थे। इसी दौरान अचानक शेरनी ने पीछे से हमला कर दिया। उसने पहले पीठ पर वार किया और फिर हाथ को मुंह में दबोच लिया। लगातार संघर्ष करने के बाद उन्होंने शेरनी को खरोंचा, जिससे उसकी पकड़ ढीली हुई और वह वहां से भागने में सफल रहे। इसके बाद शेरनी उनकी गाय की ओर बढ़ गई।

पहले भी एक ग्रामीण पर किया था हमला

स्थानीय निवासी हेमूभाई गढ़वी ने बताया कि सुबह करीब 8:30 बजे शेरनी उनके घर के बाड़े में घुस आई थी। जब उन्होंने अपनी भैंस को छोड़ने की कोशिश की तो शेरनी उनकी ओर दौड़ पड़ी। हेमूभाई तुरंत पास के घर में घुस गए और दरवाजा बंद कर अपनी जान बचाई। इस दौरान उनकी भैंस भी भागी, जिससे शेरनी का ध्यान दूसरी ओर चला गया। कुछ देर बाद यही शेरनी कालूभाई पर हमला कर बैठी।

वन विभाग की टीम मौके पर, गांव में डर का माहौल

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शेरनी की तलाश शुरू कर दी। अधिकारियों के अनुसार शेरनी को सुरक्षित पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि उसे जंगल में छोड़ा जा सके।

ग्रामीणों ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग उठाई

घटना के बाद गरजिया गांव और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। कई परिवारों ने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा, जबकि पशुपालकों ने अपने मवेशियों को खुले में छोड़ना बंद कर दिया है। पंचायत प्रतिनिधियों ने वन विभाग से मांग की है कि आबादी वाले इलाकों में लगातार पहुंच रहे शेरों को सुरक्षित रूप से जंगल में स्थानांतरित किया जाए और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए।

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