जगदलपुर/ CG Prime News. Historic announcement of Naxal-free Bastar: Amit Shah said – India is now free from Naxalism. Amit Shah ने मंगलवार को Jagdalpur में शहीद जवानों के परिजनों, CAPF जवानों और नक्सल पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर बस्तर को नक्सलमुक्त घोषित किया। कार्यक्रम में Vishnu Deo Sai, Raman Singh, Vijay Sharma सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि छह दशकों से देश के लिए चुनौती बने नक्सलवाद का अंत अब हो चुका है। उन्होंने कहा कि हजारों जवानों के बलिदान और सुरक्षा बलों के संयुक्त अभियान ने तीन वर्षों में वह कर दिखाया, जो तीन पीढ़ियों तक संभव नहीं हो पाया। शाह ने 21 जनवरी 2024, 24 अगस्त 2024 और 31 मार्च 2026 को नक्सल उन्मूलन अभियान की ऐतिहासिक तिथियां बताया।
शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा’ बनेगा विकास का नया केंद्र
गृह मंत्री ने बस्तर में ‘शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा’ परियोजना की शुरुआत करते हुए कहा कि अब तक सुरक्षा का केंद्र रहे CAPF कैंप अब ग्रामीण विकास के मॉडल के रूप में भी काम करेंगे। शुरुआती चरण में 70 कैंपों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। यहां आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य सुविधा, डेयरी कलेक्शन, कृषि मार्गदर्शन और कौशल विकास जैसी सेवाएं उपलब्ध होंगी।
उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सली अभियान खत्म होने के बाद अब बस्तर विकास और रोजगार के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। शाह ने यह भी कहा कि बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनने की क्षमता रखता है।
तीन हजार नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
अमित शाह ने बताया कि आत्मसमर्पण कर चुके करीब 3000 नक्सलियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार ने प्रारंभिक तौर पर 20 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसके तहत स्किल डेवलपमेंट, शिक्षा और सामाजिक पुनर्वास पर काम किया जाएगा ताकि वे मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट की सराहना
गृह मंत्री ने ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’, ‘ऑपरेशन प्रहार’ और अन्य अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि 45 डिग्री तापमान, माइंस और कठिन परिस्थितियों के बीच जवानों ने असाधारण साहस दिखाया। उन्होंने CRPF, BSF, ITBP, SSB, DRG, STF और बस्तर फाइटर्स सहित सभी सुरक्षा बलों को नक्सलमुक्त बस्तर का श्रेय दिया।
अब नहीं होगी लेवी और हिंसा
अमित शाह ने भरोसा दिलाया कि अब बस्तर में स्कूल बंद नहीं होंगे, किसानों से लेवी नहीं मांगी जाएगी और तेंदूपत्ता व धान की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन यहां की सांस्कृतिक पहचान को फिर से मजबूत करेंगे।
