CG Prime News@भिलाई. भिलाई नगर विधानसभा सीट से 2023 में करीब 1,200 मतों के अंतर से निर्वाचित देवेंद्र यादव से जुड़ी चुनाव याचिका अब ट्रायल के चरण में पहुंच गई है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा नेता प्रेम प्रकाश पांडेय की ओर से जनवरी 2024 में दायर चुनाव याचिका में देवेंद्र यादव के नामांकन पत्र में कथित तौर पर संपत्ति, आपराधिक प्रकरण और न्यायालय से संबंधित जानकारी को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में भ्रष्ट आचरण के भी आरोप लगाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दूसरी चुनौती भी खारिज
चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर समाप्त कराने के लिए देवेंद्र यादव की ओर से हाईकोर्ट में आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन दिया गया था। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। SLP No. 6306/2025 के जरिए की गई चुनौती भी स्वीकार नहीं की गई, जिससे याचिका के मेरिट पर ट्रायल का रास्ता खुला रहा।
इसके बाद हाईकोर्ट में वाद-प्रश्न निर्धारित होने के बाद आदेश 14 नियम 2 के तहत भी आवेदन प्रस्तुत किया गया। हाईकोर्ट ने इस आवेदन को भी खारिज कर दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए देवेंद्र यादव की ओर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया।

31 अगस्त से शुरू होगी ट्रायल की कार्यवाही
25 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद इस चुनौती पर भी आगे राहत नहीं मिली। इसके साथ ही अब चुनाव याचिका की सुनवाई हाईकोर्ट में ट्रायल के स्तर पर आगे बढ़ेगी। हाईकोर्ट पहले ही वाद-प्रश्न निर्धारित कर चुका है और 31 अगस्त से मामले में ट्रायल शुरू होने की बात सामने आई है।
अब अदालत में मामले का परीक्षण प्रारंभिक कानूनी आपत्तियों के बजाय आरोपों, दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर होगा। हालांकि अंतिम परिणाम ट्रायल की प्रक्रिया पूरी होने और अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

पांडेय पक्ष ने दी सुनवाई की जानकारी
प्रेम प्रकाश पांडेय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश AOR अधिवक्ता देवाशीष तिवारी ने 25 अगस्त की सुनवाई और आदेश की जानकारी दी। उनके अनुसार, देवेंद्र यादव की ओर से की गई चुनौती खारिज होने के बाद अब चुनाव याचिका का ट्रायल हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगा।
निर्वाचन की वैधता पर पड़ेगा असर
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव याचिका सीधे 2023 के भिलाई नगर विधानसभा चुनाव परिणाम से जुड़ी है। यदि याचिका में लगाए गए आरोप ट्रायल के दौरान साक्ष्यों से सिद्ध होते हैं और अदालत याचिका के पक्ष में फैसला देती है, तो इसका प्रभाव देवेंद्र यादव के निर्वाचन और विधानसभा सदस्यता पर पड़ सकता है। हालांकि अभी ऐसा कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है।
अब 31 अगस्त से शुरू होने वाली कार्यवाही में यह तय होगा कि याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप और प्रस्तुत साक्ष्य अदालत की कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं। फिलहाल मामला प्रारंभिक कानूनी चुनौतियों से आगे बढ़कर न्यायिक ट्रायल के चरण में पहुंच गया है।
