Monday, August 10, 2026
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जशपुर में 30 हजार रिश्वत लेते SDO गिरफ्तार

पूर्व उपसरपंच से की थी 70 हजार रिश्वत की डिमांड

by Dakshi Sahu Rao
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जशपुर में 30 हजार रिश्वत लेते SDO गिरफ्तार

CG Prime News@जशपुर. SDO arrested while accepting a bribe of 30,000 in Jashpur छत्तीसगढ़ में घूसखोरी का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जशपुर में एक और घूसखोर अधिकारी को एसीबी (ACB) ने रंगे हाथ पकड़ा है। यहां एसडीओ (SDO) को 30 हजार रिश्वत लेते हुए एसीबी (ACB) ने गिरफ्तार किया है। मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कपरोल में एसडीओ संजय दिवाकर ने मनरेगा का काम पूरा होने के बाद 6 महीने तक पेमेंट रोक दिया। फिर उस प्रोसेस को आगे बढ़ाने के एवज में पूर्व उपसरपंच से 70 हजार रिश्वत की डिमांड की थी।

घर में मंगाया रिश्वत की रकम

पूर्व उपसरपंच ने पहले ही इसकी शिकायत एसीबी से कर दी थी। एसडीओ ग्राम मधुबन टोली का रहने वाला है। बुधवार (17 जून) को पूर्व उपसरपंच 50 हजार देने घर पहुंचा था, तभी घूस लेते हुए एसीबी की टीम ने दबिश देकर उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

पहले दिया 50 हजार रुपए

पूर्व उपसरपंच का आरोप है कि काम की जांच पूरी कराने के लिए उन्हें 50 हजार रुपए देने पड़े। इसके बाद जांच की प्रक्रिया तो पूरी हो गई, लेकिन भुगतान से जुड़ी जरूरी औपचारिकताएं फिर अटक गईं। भुगतान जारी कराने के नाम पर प्रभारी एसडीओ ने दोबारा 30 हजार रुपए की रिश्वत मांगनी शुरू कर दी।


शिकायत के बाद किया ट्रैप

बार-बार रिश्वत की मांग से परेशान होकर पूर्व उपसरपंच ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से शिकायत की। शिकायत की जांच और पुष्टि के बाद एसीबी ने आरोपी अधिकारी को रंगे हाथ पकडऩे के लिए जाल बिछाया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

बरामद हुई रिश्वत की रकम

कार्रवाई के दौरान एसीबी ने आरोपी के पास से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली। एसीबी ने संजय दिवाकर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। फिलहाल एसीबी पूरे मामले की जांच कर रही है।

6 महीने तक फाइल रोकी

शिकायत के अनुसार निर्माण कार्य की जांच और पेमेंट प्रोसेस को आगे बढ़ाने के लिए एसडीओ संजय दिवाकर ने शुरुआत में 70 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। पैसे नहीं मिलने पर उन्होंने करीब 6 महीने तक फाइल को जानबूझकर रोके रखा। बाद में जब शिकायतकर्ता ने फिर संपर्क किया, तो कथित तौर पर रिश्वत की मांग घटाकर 50 हजार रुपए कर दी गई।

 

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