बिलासपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर की माननीय डिवीजन बेंच ने टाउनशिप के दुकानदारों द्वारा दायर रिट अपील WA-35/2026 को खारिज कर दिया है। इससे पहले 33 व्यापारियों की ओर से दाखिल रिट याचिका WPC-2606/2025 को भी 31 अक्टूबर 2025 को एकल न्यायाधीश द्वारा खारिज किया जा चुका था। उक्त आदेश के खिलाफ दाखिल अपील पर 02 फरवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपील निराधार है।
SAIL की नीति को कोर्ट की हरी झंडी
डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि SAIL (सेल) द्वारा उठाई गई विवादित मांगें बोर्ड-स्वीकृत लीज़ नवीनीकरण नीति पर आधारित हैं, जो सभी समान स्थिति वाले लीज़धारकों पर समान रूप से लागू होती है। ये मांगें प्रमाणित प्रोफेशनल्स द्वारा किए गए वैल्यूएशन पर आधारित हैं। कोर्ट ने माना कि ऐतिहासिक या पुराने कम लीज़ रेट, वर्तमान बाजार परिस्थितियों के अनुसार नीति में बदलाव से सार्वजनिक प्राधिकरण को नहीं रोक सकते।
ऑटोमैटिक रिन्यूअल का दावा खारिज
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि 33 वर्ष की लीज़ अवधि समाप्त होने के बाद किरायेदारों को स्वतः (automatic) नवीनीकरण का कोई अधिकार नहीं है। लीज़ का नवीनीकरण हमेशा lessor यानी SAIL की मर्जी और नई शर्तों पर निर्भर करेगा। पुराने टर्म्स पर नवीनीकरण को लेकर कोई प्रवर्तनीय कानूनी अधिकार दुकानदार साबित नहीं कर सके।
Public Premises Act लागू
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित दुकानें “पब्लिक प्रिमाइसेस” की श्रेणी में आती हैं। इसलिए नवीनीकरण या बेदखली जैसे मामलों में मुख्यतः Public Premises Act की प्रक्रिया लागू होगी। केवल किराया या occupation charge लेते रहने से TPA की धारा 116 के तहत “holding over tenancy” नहीं बनती।
अब कुर्की की कार्रवाई संभव
फैसले के बाद जिन दुकानदारों ने अब तक लीज़ रेंट या राजस्व जमा नहीं किया है, उनके खिलाफ भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) एस्टेट कोर्ट के माध्यम से कुर्की की कार्रवाई कर सकता है। कोर्ट ने माना कि SAIL की मौजूदा नीति वैध है और उसी के अनुसार प्रीमियम, ग्राउंड रेंट व सर्विस चार्ज देना होगा।
