CG Prime News@दिल्ली. BRICS summit 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक हुई। करीब 45 मिनट चली इस मुलाकात पर भारत और रूस के बीच रणनीतिक, रक्षा और आर्थिक सहयोग को लेकर खास नजर रही। बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन का गर्मजोशी से गले लगाकर स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने रूसी राष्ट्रपति को तमिल साहित्य की प्रसिद्ध कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भी भेंट किया।

भारत मंडपम में PM मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक
रक्षा सहयोग पर अहम बातचीत की संभावना
मोदी और पुतिन के बीच हुई बातचीत का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा फिलहाल सामने नहीं आया है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक में भारत और रूस के बीच बड़े रक्षा सौदों पर चर्चा संभव है। इनमें रूस के Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट की संभावित खरीद और उसके निर्माण से जुड़ी तकनीक साझा करने का प्रस्ताव अहम माना जा रहा है।

Su-57 रूस का उन्नत स्टेल्थ लड़ाकू विमान है। इसकी खासियत कम रडार दृश्यता और लंबी दूरी के मिशनों के लिए उन्नत क्षमताएं हैं। यदि इस विमान को लेकर समझौता आगे बढ़ता है तो यह भारत की वायु शक्ति के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भारत मंडपम में PM मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक

S-400 और BrahMos-NG पर भी नजर
बैठक में भारत को S-400 मिसाइल सिस्टम की शेष खेप की आपूर्ति और BrahMos-NG जैसे उन्नत रक्षा प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक और संयुक्त उत्पादन को आगे बढ़ाना भी एजेंडे में रह सकता है।
कारोबार और रणनीतिक सहयोग पर फोकस
भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर भी बातचीत संभव है। दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर आगे बढ़ने के रास्तों पर चर्चा कर सकते हैं। उद्योग, रेलवे, स्टील और टनलिंग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार में नए अवसरों पर भी विचार संभव है। परमाणु ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, कुशल कामगारों और उर्वरक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना भी दोनों देशों के व्यापक आर्थिक एजेंडे का हिस्सा हो सकता है।
उज्बेकिस्तान में भी किया था तिरुक्कुरल का जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी पहले भी तिरुक्कुरल को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की बात कर चुके हैं। अगस्त में उज्बेकिस्तान दौरे के दौरान उन्होंने इस प्रसिद्ध तमिल कृति का उज्बेक भाषा में अनुवाद किए जाने का सुझाव दिया था। उनका कहना था कि इससे उज्बेकिस्तान के लोगों को भारतीय दर्शन और विचारों को समझने में मदद मिलेगी।
