CG Prime News @ दुर्ग। बाल यौन शोषण सामग्री को इंटरनेट और सोशल मीडिया पर शेयर और अपलोड करने वालों पर दुर्ग पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की साइबर टिपलाइन से मिली सूचना पर पुलिस ने जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 67(B) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
साइबर टिपलाइन से कैसे मिली जानकारी?
भारत सरकार राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष व्यवस्था चलाती है। इसी की साइबर टिपलाइन से साइबर सेल दुर्ग को सूचना मिली कि जिले के कुछ लोग इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक और यौन शोषण वाली सामग्री का आदान-प्रदान और अपलोड कर रहे हैं।
पुलिस ने आरोपियों को कैसे पकड़ा?
सूचना की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल दुर्ग और संबंधित थानों की संयुक्त टीम बनाई गई। टीम ने आईपी एड्रेस, मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया अकाउंट की बारीकी से तकनीकी जांच की। इसी जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान हुई और अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दबिश देकर उन्हें गिरफ्तार किया गया।

किन थानों में कौन से मामले दर्ज हुए?
आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 67(B) के तहत कुल 6 अपराध दर्ज किए गए हैं।
- थाना पुरानी भिलाई: अपराध क्रमांक 630/2026
- थाना छावनी: अपराध क्रमांक 759/2026
- थाना जामुल: अपराध क्रमांक 835/2026 और 836/2026
- थाना नेवई: अपराध क्रमांक 741/2026
- थाना बोरी: अपराध क्रमांक 97/2026
गिरफ्तार आरोपियों के नाम
- पोषण लाल देवांगन, रामनगर, सुपेला
- दिनेश प्रजापति (20 साल), बासिन, करंजा
- उमेश कुमार साहू (43 साल), भाठापारा, कुरूद
- मुकेश विश्वकर्मा (23 साल), ग्राम ढौर, जामुल
- प्रकाश दास (26 साल), बीआरपी कॉलोनी, मरोदा
पुलिस की सूची में नाबालिग आरोपियों का भी जिक्र है। कानून के अनुसार नाबालिगों की पहचान उजागर नहीं की जा सकती, इसलिए उनके नाम और पते नहीं दिए जा रहे हैं। इस कार्रवाई में साइबर सेल दुर्ग की तकनीकी टीम और संबंधित थानों के प्रभारियों व स्टाफ की अहम भूमिका रही।

दुर्ग पुलिस की अभिभावकों और नागरिकों से अपील
पुलिस ने साफ कहा है कि बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक या यौन शोषण वाली सामग्री बनाना, डाउनलोड करना, शेयर करना, अपलोड करना या मोबाइल में रखना भी गंभीर अपराध है। अभिभावक बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और उनके इंटरनेट व सोशल मीडिया इस्तेमाल की निगरानी करें। ऐसी कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत पुलिस को बताएं या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। पुलिस के मुताबिक ऐसे अपराधों में शामिल लोगों पर आगे भी सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
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