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Mahadev Satta: सौरभ चंद्राकर की पूरी कहानी, भिलाई से दुबई तक कैसे फैला नेटवर्क?

ओमान से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाए गए महादेव ऑनलाइन बुक मामले के मुख्य आरोपी सौरभ

by Dakshi Sahu Rao
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CG Prime News@भिलाई। Mahadev satta saurabh chandrakar मामला एक बार फिर चर्चा में है। महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) सट्टा ऐप के प्रमुख आरोपियों में शामिल भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाया गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ऑनलाइन सट्टे के नेटवर्क, फर्जी बैंक खातों, हवाला लेन-देन और विदेशों में कथित संपत्ति निवेश की जांच कर रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क का विस्तार भारत से लेकर दुबई तक था।

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Mahadev Satta Case: भिलाई से शुरू हुई सौरभ चंद्राकर की कहानी

छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर का नाम महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा ऐप मामले में प्रमुखता से सामने आया। ED की जांच के अनुसार, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल इस नेटवर्क के कथित मुख्य संचालकों में शामिल थे। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में ED ने अक्टूबर 2022 में जांच शुरू की थी।


जांच में महादेव ऑनलाइन बुक के अलावा रेड्डी अन्ना, फेयरप्ले, स्काईएक्सचेंज और लोटस 365 जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े संभावित वित्तीय संबंधों की भी पड़ताल की गई।

Mahadev Betting App: हजारों पैनल से चलता था सट्टे का नेटवर्क

जांच एजेंसी के मुताबिक, महादेव सट्टा ऐप का नेटवर्क भारत और UAE में हजारों ऑनलाइन पैनल के माध्यम से संचालित किया जाता था। इन प्लेटफॉर्म पर क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस और अन्य खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाए जाने का आरोप है।

ED के अनुसार, मुख्य संचालकों की ओर से पैनल ऑपरेटरों को लॉगिन आईडी उपलब्ध कराई जाती थी। इसके बाद स्थानीय स्तर पर बैंक खाते, मोबाइल फोन, इंटरनेट और कर्मचारियों की व्यवस्था करके नेटवर्क चलाया जाता था। WhatsApp और Telegram जैसे माध्यमों से सट्टा खेलने वालों तक पहुंच बनाई जाती थी।

फर्जी बैंक खाते और हवाला से विदेश भेजी जाती थी रकम

Mahadev satta saurabh chandrakar मामले में जांच का एक अहम पहलू कथित वित्तीय लेन-देन है। ED की जांच में दूसरे व्यक्तियों के नाम पर खोले गए बैंक खातों, कमीशन पर उपलब्ध कराए गए खातों और संदिग्ध KYC दस्तावेजों की पड़ताल की गई है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि सट्टे से प्राप्त रकम को कई बैंक खातों में बांटने के बाद नकद और हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। कुछ रकम के दुबई स्थित कंपनियों और संपत्तियों में निवेश किए जाने के साथ भारतीय शेयर बाजार तक पहुंचने के आरोपों की भी जांच की गई।

दुबई में आलीशान जिंदगी

सौरभ चंद्राकर का पहले भिलाई में जूस का दुकान था।  जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, महादेव ऐप नेटवर्क के विस्तार के बाद उसकी आर्थिक गतिविधियों में तेजी से बदलाव आया।  ED ने विदेश में संपत्तियों, यात्रा, होटल और अन्य महंगे खर्चों के स्रोतों की जांच की है। एजेंसी का आरोप है कि इन खर्चों के लिए कथित तौर पर ऑनलाइन सट्टे से प्राप्त धन का इस्तेमाल किया गया।

भिलाई में जूस की दुकान से दुबई की आलीशान जिंदगी तक

सौरभ चंद्राकर पहले भिलाई में जूस की दुकान चलाता था। लेकिन महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क के विस्तार के बाद उसकी आर्थिक गतिविधियों में कथित तौर पर बड़ा बदलाव आया। ED ने विदेश में संपत्तियों, महंगी यात्राओं, होटलों और अन्य खर्चों के स्रोतों की जांच की है। Central Bureau of Investigation (CBI) एजेंसी का आरोप है कि इन खर्चों के लिए ऑनलाइन सट्टे से प्राप्त धन का इस्तेमाल किया गया था।

दुबई में शादी पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप

फरवरी 2023 में UAE के रास अल खैमाह में सौरभ चंद्राकर की शादी भी जांच का बड़ा विषय बनी। ED के अनुसार, शादी और उससे जुड़े आयोजनों पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का आरोप है।

जांच एजेंसी ने आयोजन से जुड़ी इवेंट कंपनियों, होटल, ट्रैवल एजेंट और विमान सेवा प्रदाताओं के रिकॉर्ड की पड़ताल की। आरोप है कि भुगतान का एक हिस्सा नकद और हवाला के जरिए किया गया था। शादी में फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों की मौजूदगी और कार्यक्रमों के भुगतान की भी जांच की गई।

रवि उप्पल समेत अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच

महादेव सट्टा ऐप मामले में रवि उप्पल, विकास छपरिया, शुभम सोनी और अन्य कथित सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रही है। ED के अनुसार, इन लोगों के नाम नेटवर्क के संचालन और वित्तीय लेन-देन से जुड़े विभिन्न आरोपों में सामने आए हैं। Enforcement Directorate (ED) जांच एजेंसियों ने मामले में कई संपत्तियों को जब्त या अटैच करने की कार्रवाई भी की है।

सौरभ चंद्राकर के भारत आने के बाद आगे क्या?

सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण के बाद महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा ऐप मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। अब जांच एजेंसियां नेटवर्क के संचालन, कथित अवैध कमाई, बैंक खातों, हवाला लेन-देन और विदेशों में निवेश से जुड़े पहलुओं की पड़ताल आगे बढ़ा सकती हैं।

भिलाई से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक चर्चा में आए इस मामले में आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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