भिलाई। नेहरूनगर स्थित पल्स हॉस्पिटल में सोमवार दोपहर एक प्रसूता की अचानक मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। महिला की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि ऑपरेशन से डिलीवरी होने के बाद सब कुछ सामान्य था। हालांकि, ग्लूकोज में इंजेक्शन लगाए जाने के करीब 10 मिनट बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। इसके बाद भी समय पर डॉक्टर और नर्स उपलब्ध नहीं हुए। आखिरकार प्रसूता ने दम तोड़ दिया।
इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत, परिजनों ने उठाए सवाल
परिजनों के मुताबिक, मृतिका प्रकृति का पिछले छह महीने से पल्स हॉस्पिटल में उपचार चल रहा था। प्रसव के लिए उसका ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बाद शुरुआती स्थिति सामान्य बताई गई। परिवार को उम्मीद थी कि मां और बच्चा दोनों सुरक्षित रहेंगे। लेकिन कुछ देर बाद अस्पताल में ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं।
परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने ग्लूकोज में एक इंजेक्शन लगाया था। इसके लगभग 10 मिनट बाद ही प्रकृति की तबीयत बिगड़ने लगी। उसकी हालत देखकर परिजनों ने तत्काल डॉक्टर को बुलाने की मांग की। उनका कहना है कि उस समय कोई डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं थी। वहीं, बार-बार बुलाने के बावजूद नर्स भी तत्काल नहीं पहुंची। परिवार का आरोप है कि समय पर चिकित्सा सहायता मिलती तो शायद प्रकृति की जान बच सकती थी।
अस्पताल में हंगामा, प्रबंधन ने साधी चुप्पी
प्रसूता की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए। उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर विरोध जताया। परिवार ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऑपरेशन के बाद जब महिला की स्थिति सामान्य थी, तब इंजेक्शन लगाने के बाद अचानक ऐसा क्या हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए।
दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन इस पूरे मामले में मीडिया के सामने कुछ भी कहने से बचता नजर आया। फिलहाल प्रबंधन की ओर से घटना और लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।

पुलिस में शिकायत करेंगे परिजन
मृतिका के परिजनों ने साफ कहा है कि वे इस मामले को चुपचाप नहीं छोड़ेंगे। उनका आरोप है कि अस्पताल की कथित लापरवाही के कारण उनकी बहू की जान गई है। इसलिए वे पुलिस से शिकायत कर मामले की जांच कराने की मांग करेंगे।
अब इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि प्रसूता की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी? इंजेक्शन में कौन-सी दवा थी और उसे किस चिकित्सकीय निर्देश पर दिया गया? साथ ही, आपात स्थिति में डॉक्टर और नर्स की उपलब्धता क्यों नहीं रही? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
