Monday, June 8, 2026
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झोलाछाप डॉ. की करतूत से युवक की मौत, बिना लाइफ सपोर्ट रेफर का आरोप

धमतरी जिले के मगरलोड क्षेत्र की घटना, परिजनों और आदिवासी समाज ने की कार्रवाई की मांग; अवैध क्लीनिकों पर सख्त कदम उठाने की उठी आवाज

by cgprimenews.com
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धमतरी जिले में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और कथित चिकित्सकीय लापरवाही का प्रतीकात्मक दृश्य

कुरूद/मगरलोड। A quack doctor allegedly referred a young man without life support and killed him. धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक में एक युवक की मौत के बाद कथित झोलाछाप डॉक्टर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सांकरा गांव निवासी 34 वर्षीय तीरथ राम कंवर की मौत के मामले में परिजनों और स्थानीय लोगों ने लापरवाही का आरोप लगाया है। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

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मामूली बुखार के बाद कराया गया उपचार

जानकारी के अनुसार, तीरथ राम कंवर को बुखार की शिकायत होने पर परिजन उसे उपचार के लिए भोथीडीह स्थित एक निजी चिकित्सक के पास लेकर गए थे। आरोप है कि वहां बिना पर्याप्त चिकित्सकीय जांच के मरीज को दवाएं और सलाइन चढ़ाई गई। उपचार के कुछ समय बाद युवक की तबीयत और बिगड़ने लगी।

गंभीर हालत में किया गया रेफर

परिजनों का आरोप है कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद मरीज को आवश्यक जीवन रक्षक सुविधाओं या एम्बुलेंस की व्यवस्था के बिना निजी वाहन से दूसरे अस्पताल भेजा गया। रास्ते में उसकी हालत लगातार खराब होती गई। बताया जा रहा है कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही युवक ने दम तोड़ दिया।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक तीरथ राम कंवर अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र बताया जा रहा है। वह परिवार का प्रमुख कमाऊ सदस्य भी था। उसकी असमय मौत से परिवार गहरे सदमे में है। गांव में भी शोक का माहौल बना हुआ है।

आदिवासी समाज ने उठाई कार्रवाई की मांग

घटना के बाद सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों और बिना मान्यता के चिकित्सा सेवाएं देने वालों पर प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है। समाज ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग प्रशासन से की है।

जांच के बाद स्पष्ट होंगे तथ्य

फिलहाल मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है। प्रशासनिक और पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उपचार प्रक्रिया में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं। स्थानीय लोगों की नजर अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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