दुर्ग. चिखली गांव की रहने वाली वंदना वर्मा के परिवार के लिए जीवन आसान नहीं था। सीमित आय और बढ़ते खर्चों के बीच बच्चों की पढ़ाई जारी रखना एक बड़ी चुनौती बन गया था। पति अजय वर्मा का छोटा व्यवसाय परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं था, ऐसे में वंदना ने मनरेगा के तहत काम शुरू कर घर संभालने की जिम्मेदारी उठाई।
योजना बनी सहारा
इसी बीच दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के तहत वंदना के खाते में 10 हजार रुपये की सहायता राशि आई। यह रकम उनके लिए किसी राहत से कम नहीं थी। इस आर्थिक सहयोग ने न केवल उनके दैनिक जीवन को सहारा दिया, बल्कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की नई उम्मीद भी जगाई।
शिक्षा को प्राथमिकता
वंदना अब इस राशि का उपयोग अपने बच्चों की पढ़ाई में करेंगी। किताबें, स्कूल फीस और अन्य जरूरी खर्च अब आसानी से पूरे हो पाएंगे। उन्होंने बताया कि यह योजना उनके जैसे कई जरूरतमंद परिवारों के लिए एक मजबूत आधार बन रही है।
सरकार के प्रति आभार
वंदना वर्मा ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इस योजना ने उनके परिवार को मुश्किल समय में संबल दिया है और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद की है।
