CG Prime News@दुर्ग. central jail durg lifer prisoner passed class 12 first division कहते हैं कि शिक्षा जीवन को नई दिशा देने की सबसे बड़ी शक्ति है। इसका प्रेरणादायी उदाहरण केंद्रीय जेल दुर्ग में सामने आया है, जहां आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे एक बंदी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाकर नई मिसाल कायम की है।
अशिक्षा से शिक्षा की ओर बढ़ाया कदम
भिलाई के सुपेला क्षेत्र निवासी विमल वर्ष 2018 से हत्या के एक मामले में केंद्रीय जेल दुर्ग में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। जेल में प्रवेश के समय वे अशिक्षित थे, लेकिन शिक्षा के महत्व को समझते हुए उन्होंने पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के मार्गदर्शन और जेल प्रशासन की पहल से संचालित शैक्षणिक कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने पहली कक्षा से अपनी शिक्षा यात्रा प्रारंभ की।
12वीं में प्रथम श्रेणी, अंग्रेजी में डिस्टिंक्शन
लगातार मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर विमल ने कक्षा 12वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। विशेष बात यह रही कि उन्होंने अंग्रेजी विषय में डिस्टिंक्शन हासिल कर उल्लेखनीय सफलता दर्ज की। यह उपलब्धि केवल परीक्षा में सफलता नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसुधार और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
शिक्षक बनकर समाज को लौटाना चाहते हैं योगदान
बंदी ने अपनी सजा पूरी होने के बाद समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन जीने की इच्छा जताई है। उन्होंने शिक्षक बनकर बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक और प्रेरित करने का संकल्प भी व्यक्त किया है। उनका यह लक्ष्य शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति को दर्शाता है।
103 बंदियों ने विभिन्न परीक्षाओं में हासिल की सफलता
जानकारी के अनुसार केंद्रीय जेल दुर्ग में संचालित शैक्षणिक कार्यक्रमों के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में महिला और पुरुष बंदियों ने पहली कक्षा से लेकर एमए अंतिम वर्ष तक की परीक्षाओं में भाग लिया। इनमें कुल 103 बंदी सफल रहे। यह उपलब्धि जेल परिसर में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और सकारात्मक माहौल को दर्शाती है।
सुधारात्मक न्याय व्यवस्था का सशक्त उदाहरण
जेल प्रशासन, जेल अधीक्षक, शिक्षकों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त प्रयासों से बंदियों को शिक्षा का अवसर मिल रहा है। विमल की सफलता यह संदेश देती है कि अपराध किसी व्यक्ति की स्थायी पहचान नहीं होता। सही मार्गदर्शन, शिक्षा और अवसर मिलने पर व्यक्ति अपने जीवन को नई दिशा दे सकता है। केंद्रीय जेल दुर्ग की यह पहल सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की सार्थकता को भी मजबूती प्रदान करती है।
