दुर्ग. एनडीपीएस एक्ट के प्रकरणों की जांच को और अधिक मजबूत एवं विधिसम्मत बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण पुरानी पुलिस लाइन स्थित दधीचि प्रशिक्षण हॉल में आयोजित हुआ, जिसमें एएसआई से लेकर निरीक्षक स्तर तक कुल 65 विवेचकों ने भाग लिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य नशे से जुड़े मामलों में जांच की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और न्यायालयीन प्रक्रिया को सशक्त करना रहा।
जप्ती से चालान तक पूरी प्रक्रिया समझाई
प्रशिक्षण में विवेचकों को एनडीपीएस एक्ट के तहत केस की शुरुआती कार्रवाई से लेकर अंतिम चालान पेश करने तक की पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से समझाई गई। जप्ती, सैंपलिंग, एफएसएल परीक्षण और चेन ऑफ कस्टडी जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
विशेषज्ञों ने दिए कानूनी व तकनीकी टिप्स
कार्यक्रम में एजीपी प्रकाश शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कसार और के.के. द्विवेदी ने न्यायालयीन दृष्टिकोण से साक्ष्य संकलन, दस्तावेजीकरण और तकनीकी त्रुटियों से बचने के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। एफएसएल भिलाई के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी पंकज ताम्रकार ने नशीली दवाओं की सैंपलिंग प्रक्रिया, दस्तावेजों की शुद्धता और समय पर परीक्षण के लिए भेजने के महत्व को समझाया।
कानूनी प्रावधानों पर विशेष फोकस
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चन्द्रा ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 50, 55, 57 और 29 के प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इन धाराओं का सही पालन ही मामलों को न्यायालय में मजबूत बनाता है।
प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न
पुलिस कार्यालय एवं लाइन स्टाफ के समन्वय से आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इससे एनडीपीएस मामलों की विवेचना और अधिक प्रभावी होगी।
