Monday, August 10, 2026
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नारायणपुर में ईसाई धर्म मानने वाले 26 परिवारों को गांव से बाहर निकाला, फोर्स तैनात

धर्मांतरण को लेकर भरेंडा गांव में बवाल, ग्रामीणों ने सुनाया मूल धर्म में लौटने का फरमान

by Dakshi Sahu Rao
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नारायणपुर में ईसाई धर्म मानने वाले 26 परिवारों को गांव से बाहर निकाला, फोर्स तैनात

CG Prime News@नारायणपुर. 26 Christian families driven out of the village in Narayanpur छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर एक बार फिर बवाल हो गया है। नारायणपुर जिले में ईसाई धर्म को मानने वाले 26 परिवारों का ग्रामीणों ने गांव से निकाल दिया है। इसके बाद सभी परिवार गांव के बाहर पेड़ों की छांव में रहने को मजबूर हैं। मामला भरेंडा थाना क्षेत्र के भरेंडा गांव का है।

एक महीने में मूल धर्म में लौटने का फरमान

इस विवाद के बाद गांव वालों ने ईसाई धर्म को मानने वालों को अल्टीमेटम दिया है कि, वे एक महीने के अंदर मूल धर्म में लौट आएं। नहीं तो गांव से बाहर किया जाएगा। इस बात पर दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ है। गांव से बाहर निकाले गए ग्रामीण अपने घर लौट गए हैं। हालांकि, इस विवाद को देखते हुए पुलिस फोर्स तैनात किया गया है।

 नारायणपुर में ईसाई धर्म मानने वाले 26 परिवारों को गांव से बाहर निकाला, फोर्स तैनात

नारायणपुर में ईसाई धर्म मानने वाले 26 परिवारों को गांव से बाहर निकाला, फोर्स तैनात


गांव छोड़कर नहीं जाना चाहते

आरोप है कि मंगलवार को भरेंडा गांव के कुछ ग्रामीणों ने ईसाई धर्म को मानने वाले परिवारों को गांव छोडऩे का फरमान सुनाया और घरों से बाहर निकाल दिया। उनका कहना है कि वे गांव छोड़कर नहीं जाना चाहते। वहीं, मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने गांव में बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती कर दी है।

गांव बना पुलिस छावनी

मामले की गंभीरता को देखते हुए नारायणपुर पुलिस ने पूरे गांव में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। किसी भी तरह की अप्रिय घटना और दोनों पक्षों के बीच संभावित टकराव को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

आदिवासी परंपरा पर पड़ रहा असर

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में बड़ी संख्या में लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया है, जिससे उनकी पारंपरिक आदिवासी संस्कृति, रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। इसी को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है।

प्रताड़ित करने का आरोप

ईसाई धर्म मानने वाले संत राम दुग्गा, चैतू कुमेटी, मनायकु वट्टी समेत अन्य लोगों का कहना है कि वे सालों से गांव में रह रहे हैं, लेकिन अब उन्हें अपने धार्मिक विश्वास के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि उनका सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा है और उन्हें गांव में रहने नहीं दिया जा रहा है।

2025 से माहौल है तनावपूर्ण

बताया जा रहा है कि, दिसंबर 2025 से गांव का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ था। बीच-बीच में विवाद की घटनाएं सामने आती रहीं, लेकिन 9 जून 2026 के बाद से स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई। उस दिन दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई थी।

 

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