CG Prime News@रायगढ़. Maa Mankeshwari Devi Temple Karmagarh raigarh छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में शरद पूर्णिमा के अवसर पर मां मानकेश्वरी देवी मंदिर में सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा निभाई गई। करमागढ़ स्थित इस मंदिर में हर साल की तरह इस बार भी बल पूजा का आयोजन किया गया। रायगढ़ राजपरिवार की कुलदेवी मानी जाने वाली मां मानकेश्वरी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए छत्तीसगढ़ सहित ओडिशा और आसपास के दूरस्थ इलाकों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। मनोकामना पूरी होने पर भक्त बकरे लेकर मंदिर पहुंचे। आयोजन के दौरान करीब 50 से 60 बकरों की बलि दी गई।
शरद पूर्णिमा पर निभाई गई विशेष परंपरा
मंदिर में दोपहर बाद विधि-विधान से पूजा शुरू हुई। आयोजन को व्यवस्थित रखने के लिए मंदिर के सामने बैरिकेडिंग की गई थी। इसके जरिए पूजा स्थल पर श्रद्धालुओं और समिति के सदस्यों की आवाजाही नियंत्रित की गई। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा संपन्न होने के बाद बलि की परंपरा निभाई गई। मंदिर समिति के सदस्यों के अनुसार, हर साल बलि की संख्या एक जैसी नहीं रहती। कुछ वर्षों में यह आंकड़ा 100 से 120 तक भी पहुंच जाता है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर देवी के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए बकरा चढ़ाते हैं।

मां मानकेश्वरी मंदिर में 50 से 60 बकरों की बलि, देवी की आराधना में झूमते बैगा ने पीया खून

बैगा के खून पीने का वीडियो चर्चा में
बल पूजा के दौरान बैगा के बलि दिए गए बकरों का खून पीने का वीडियो सामने आया है। मंदिर समिति के सदस्यों और वहां मौजूद श्रद्धालुओं का मानना है कि पूजा के समय बैगा के शरीर में देवी आती हैं और इसी धार्मिक मान्यता के तहत यह परंपरा निभाई जाती है। इस दौरान श्रद्धालु बैगा के पैर धोते हैं और उनके सिर पर दूध डालकर पूजा करते हैं। समिति के सदस्यों का दावा है कि इस प्रक्रिया के बाद भी बैगा के शरीर पर कोई दुष्प्रभाव दिखाई नहीं देता। हालांकि, ये बातें स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और श्रद्धालुओं के बयानों पर आधारित हैं।
बल पूजा से पहले होती है निशा पूजा
इस परंपरा में शरद पूर्णिमा से एक रात पहले निशा पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दौरान राजपरिवार की ओर से बैगा के अंगूठे में नवरत्न की अंगूठी पहनाई जाती है। मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष युधिष्ठिर यादव के अनुसार, सामान्य दिनों में अंगूठी ढीली रहती है, जबकि बल पूजा के दिन अंगूठे में कस जाती है। इसे इस परंपरा से जुड़ी विशेष मान्यता के रूप में देखा जाता है।

रायगढ़ राजपरिवार से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
करमागढ़ स्थित मां मानकेश्वरी देवी मंदिर जिला मुख्यालय रायगढ़ से करीब 27 किलोमीटर दूर है। मंदिर को रायगढ़ राजपरिवार की कुलदेवी का स्थान माना जाता है। राज्यसभा सांसद और राजपरिवार के सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, बल पूजा की परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है। मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष युधिष्ठिर यादव भी इसे करीब 500 साल पुरानी परंपरा बताते हैं। हर साल शरद पूर्णिमा पर होने वाला यह आयोजन क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर देवी की पूजा करते हैं और अपनी आस्था के अनुसार धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।
