CG Prime News@दिल्ली. america iran conflict radar drone sites attack lebanon alert पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि उसने ईरान के गोरुक और केश्म आइलैंड स्थित रडार तथा ड्रोन कंट्रोल साइट्स पर कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना के अनुसार यह कदम ईरान की कथित आक्रामक गतिविधियों के जवाब में उठाया गया।
CENTCOM ने कहा कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को निशाना बनाए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई की गई। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि इस अभियान में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और दो ड्रोन को निष्क्रिय कर दिया गया।
ईरान का पलटवार, सैन्य ठिकाने पर हमले का दावा
दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उसने उस एयरबेस को निशाना बनाया जिसका उपयोग अमेरिकी सैन्य अभियानों में किया गया था। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रखता है।
राष्ट्रपति के इस्तीफे की रिपोर्ट से बढ़ी राजनीतिक हलचल
क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्टों में यह दावा भी सामने आया है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कथित तौर पर अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों में कहा गया है कि सत्ता संरचना और सैन्य प्रभाव को लेकर देश के भीतर राजनीतिक असहमति बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दावा सही साबित होता है तो इसका असर ईरान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों पर पड़ सकता है।
दक्षिणी लेबनान में इजराइल का अलर्ट
इसी बीच इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के सात गांवों के निवासियों को तत्काल क्षेत्र खाली करने की चेतावनी जारी की है। सेना के प्रवक्ता ने कहा कि प्रभावित इलाकों में संभावित सैन्य अभियान को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। इससे लेबनान-इजराइल सीमा पर भी तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
सीजफायर पर मंडरा रहे सवाल
विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच लागू सीजफायर लगातार दबाव में है। हालिया घटनाएं दर्शाती हैं कि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और सुरक्षा चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजारों के लिए महत्वपूर्ण बनी रह सकती है।
