CG Prime News@दुर्ग. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिक्षकों की कमी को लेकर स्कूली छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार दूसरे चरण में पहुंच गया है। पेंड्रावन के आत्मानंद स्कूल के छात्र-छात्राओं ने मंगलवार को एक बार फिर खैरागढ़-धमधा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। पांच दिन के भीतर यह दूसरी बार है, जब छात्रों ने सड़क पर उतरकर अपनी मांग उठाई है। इस मार्ग से बेमेतरा और धमधा के बीच आवागमन होता है, जिसके चलते प्रदर्शन के दौरान सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

शिक्षा मंत्री के गृह जिले में शिक्षकों की कमी से नाराज छात्र सड़क पर उतरे, किया चक्काजाम
400 छात्रों के लिए सिर्फ 3 शिक्षक और प्रिंसिपल
पेंड्रावन आत्मानंद स्कूल में कक्षा 9वीं से 12वीं तक करीब 400 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। विद्यार्थियों का आरोप है कि स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी है। वर्तमान में स्कूल में केवल तीन शिक्षक और एक प्रिंसिपल हैं। छात्रों के मुताबिक, उनकी कक्षाओं के संचालन और पाठ्यक्रम को समय पर पूरा कराने के लिए कम से कम 17 शिक्षकों की जरूरत है।

छात्रों का कहना है कि पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है और उनका कोर्स समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। उनका कहना है कि वे पढ़ाई छोड़कर सड़क पर प्रदर्शन नहीं करना चाहते, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए मजबूर होकर आंदोलन करना पड़ रहा है।
शिक्षा मंत्री के गृह जिले में प्रदर्शन
पेंड्रावन आत्मानंद स्कूल दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में स्थित है। दुर्ग शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का गृह जिला भी है। छात्रों का कहना है कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराना शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों ने उम्मीद जताई है कि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई होगी, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए दोबारा सड़क पर उतरने की जरूरत न पड़े।

21 अगस्त को भी किया था प्रदर्शन
छात्रों ने 21 अगस्त को भी शिक्षकों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर चक्काजाम किया था। उस समय प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छात्रों की समस्याएं सुनी थीं। विद्यार्थियों को उम्मीद थी कि जल्द ही स्कूल में शिक्षकों की कमी दूर की जाएगी, लेकिन 25 अगस्त तक स्थिति में बदलाव नहीं हुआ।
मांग पूरी नहीं होने से नाराज छात्रों ने मंगलवार को दोबारा सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी समस्या को लेकर कलेक्टर और शिक्षा मंत्री से ही बात करना चाहते हैं।
ओपन स्कूल बंद करने की भी मांग
छात्रों ने शिक्षकों की नियुक्ति के साथ स्कूल में संचालित ओपन स्कूल व्यवस्था को बंद करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि पहले से ही शिक्षकों की कमी है और उपलब्ध शिक्षकों को ओपन स्कूल की जिम्मेदारी में लगाए जाने से नियमित विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रभावित होती है।
