Thursday, September 17, 2026
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भाजपा जिला अध्यक्ष ने पटबंद मंदिर खुलवाकर बजाई घंटियां, खुद को बताया ‘जय मां हिंगलाज’ से बड़ा

by cgprimenews.com
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छिंदवाड़ा के जिला भाजपा अध्यक्ष अपने आप को जय मां हिंगलाज से मानने लगे बड़ा, पटबंद होने पर भी खुलवाया और बजाने लगे घंटियां

छिंदवाड़ा। देश के एकमात्र जय मां हिंगलाज मंदिर (Hinglaj Mata Mandir Chhindwara) में वैदिक नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। आरोप है कि छिंदवाड़ा भाजपा जिलाध्यक्ष शेशराव यादव ने दोपहर में तय पटबंद (मंदिर बंद) समय में समर्थकों के साथ मंदिर के अंदर प्रवेश कर पूजा-अर्चना की। जबकि इस दौरान मंदिर में माता का विश्राम होता है और पट खोलने की अनुमति नहीं होती।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच मंदिर का पटबंद था, लेकिन इसके बावजूद मंदिर का दरवाजा खोला गया और अंदर पूजा, घंटा-घड़ियाल बजाने तथा आरती करने की जानकारी सामने आई। इसी दौरान कई भक्त मंदिर के बाहर पट खुलने का इंतजार करते रहे। इससे भक्तों में नाराजगी देखने को मिली।

देश का एकमात्र हिंगलाज माता मंदिर — खास आस्था का केंद्र

1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन से पहले हिंगलाज माता के दो मंदिर थे। विभाजन के बाद पाकिस्तान वाला मंदिर सीमा के उस पार चला गया, जबकि भारत में केवल छिंदवाड़ा के परासिया में स्थित मंदिर बचा।
देशभर से भक्त यहाँ माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि माता सच्चे भाव से की गई हर मनोकामना पूरी करती हैं।


क्या होता है पटबंद?

वैदिक नियमों के अनुसार मंदिर में पूजा-पाठ का समय निश्चित होता है।

  • सुबह 6 बजे मंदिर खुलता है

  • नियमित पूजा, भोग, प्रसाद और दर्शन का क्रम चलता है

  • दोपहर में निश्चित समय के लिए पटबंद किया जाता है, जिसे माता का विश्राम काल माना जाता है

  • इस दौरान किसी को अंदर जाने या पूजा करने की अनुमति नहीं होती

  • संध्या वंदन के समय मंदिर पुनः खोला जाता है

आचार्यों के अनुसार विश्राम काल में घंटी या आरती करना अवैदिक और अनुचित माना जाता है।

भक्तों में नाराजगी ,”माता के दरबार में सब समान”

भक्तों का कहना है कि जब आम लोग नियम का पालन कर बाहर इंतजार करते हैं, तो VIP लोगों को विशेषाधिकार क्यों? कई भक्तों ने इस घटना को वैदिक परंपरा का उल्लंघन बताया और कहा कि माता के विश्राम में खलल डालना गलत है।

मंदिर में घंटी बजने की आवाज, आचार्यों ने बताया अनुचित

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पटबंद के दौरान अंदर पूजा और घंटियां बजाई गईं।
आचार्यों का कहना है—

  • विश्राम काल में पूजा करना नियम विरुद्ध

  • यदि श्रद्धा हो तो बाहर से भी भक्ति की जा सकती थी

  • ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए

जिलाध्यक्ष शेशराव यादव का पक्ष ,“मैं डेढ़ बजे पहुंचा, पंडितजी के कहने पर अंदर गया”

शेशराव यादव ने आरोपों से इनकार किया। उनका कहना है:

  • “मैं 1:30 बजे मंदिर पहुंचा था। स्वागत के बाद सामने गेट पर ही प्रणाम किया।”

  • “पंडितजी ने अंदर बुलाया, तो पर्दे के पास से ही दर्शन किया।”

  • “जानबूझकर कोई नियम नहीं तोड़ा।”

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