Wednesday, April 22, 2026
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क्रिकेट के भगवान पहुंचे बस्तर, दंतेवाड़ा में आदिवासी बच्चों से मिले सचिन तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर ने कहा कि, बस्तर में 50 स्कूल मैदानों को विकसित किया जाएगा, जहां बच्चों को बेहतर खेल सुविधाएं मिलेंगी

by Dakshi Sahu Rao
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CG Prime News@जगदलपुर. Sachin Tendulkar Visit to Bastar: Met Tribal Children in Dantewada क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर बुधवार को छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं। वे प्राइवेट जेट से अपने परिवार के साथ जगदलपुर एयरपोर्ट पर उतरे। यहां से वे सीधे दंतेवाड़ा के छिंदनार पहुंचे, जहां सिहाड़ी बीज से बनी माला से उनका स्वागत हुआ। सचिन तेंदुलकर के साथ उनकी पत्नी और बहू भी नजर आई। आदिवासी बच्चों ने सचिन तेंदुलकर और उनके परिवार का भव्य स्वागत किया।

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क्रिकेट के भगवान पहुंचे बस्तर, दंतेवाड़ा में आदिवासी बच्चों से मिले सचिन तेंदुलकर

बस्तर में 50 मैदानों को किया जाएगा विकसित

सचिन तेंदुलकर ने बस्तर दौरे के दौरान कहा कि बस्तर में 50 स्कूल मैदानों को विकसित किया जाएगा। जहां बच्चों को बेहतर खेल सुविधाएं मिलेंगी। ‘मैदान कप प्रतियोगिता के जरिए हजारों बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलेगा। इस पहल को जिला प्रशासन, मांदेशी और सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन का सहयोग मिल रहा है।

CM भी शामिल होने वाले थे कार्यक्रम में

जानकारी के मुताबिक, सचिन तेंदुलकर का 3 जगह कार्यक्रम तय था। लेकिन गीदम ऑडिटोरियम में शिक्षकों-बच्चों से मुलाकात और पनेड़ा क्रिकेट ग्राउंड का उद्घाटन दौरा रद्द हो गया है। सचिन तेंदुलकर के साथ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी आने वाले थे, लेकिन किसी कारण से उनका दौरा कैंसिल हो गया है। मास्टर-ब्लास्टर के दौरे को लेकर सुरक्षा के लिहाज से भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

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5 हजार से ज्यादा बच्चों को मिलेगा लाभ

मिली जानकारी के अनुसार इस अभियान से 5 हजार से ज्यादा बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा। कबड्डी, खो-खो, एथलेटिक्स और वॉलीबॉल जैसे खेलों के जरिए बस्तर के युवाओं को नई पहचान देने की तैयारी है।

कोच को भेजेंगे जो 100 टीचर्स को देंगे ट्रेनिंग

कार्यक्रम में सचिन तेंदुलकर ने कहा कि हमें पता चला कि बस्तर में बच्चों के लिए ग्राउंड ही नहीं है। मेरी जिंदगी की शुरुआत मैदान से हुई थी। मैं बच्चों को देखता हूं जैसे मेरी जर्नी स्टार्ट हुई, हम मैदान में जाते हैं अच्छे कोच की जरूरत होती है। हमने सोचा था कि हम अपने कोच को यहां भेजेंगे ताकि वे 100 टीचर्स को ट्रेनिंग दें।

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पिता ने कहा था-अच्छे इंसान बनो

यहां डायमंड बहुत हैं, बस सही तरीके से पॉलिश करना जरूरी है। यही उम्र है खेलने कूदने की। यही उम्र है दोस्त बनाने की। मैं समझता हूं जो एक सही दोस्त होता है वो आईना दिखता है, परछाई कभी साथ नहीं छोड़ती। इसलिए ऐसे दोस्त रखो जो ऐसे ही बनकर रहे। मेरे पिता ने एडवाइस दी कि क्रिकेट कितने साल चलेगा, मैंने कहा 10 से 15 साल, मेरे पिता ने कहा था उसके बाद क्या? आप अच्छे इंसान बनो ताकि लोग आपको याद रखें।

 

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