Thursday, June 25, 2026
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Breaking: दुर्ग की महिला प्रधान आरक्षक मोनिका सोनी बर्खास्त, नौकरी लगवाने के नाम पर अवैध वसूली का आरोप

by Dakshi Sahu Rao
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CG Prime News@भिलाई. छत्तीसगढ़ शासन गृह पुलिस विभाग ने दुर्ग निवासी महिला हेड कांस्टेबल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि जारी आदेश में मोनिका सोनी पर आरोप था, कि उन्होंने अभय कुमार की पुत्री प्रीति पटेल साहू को नौकरी दिलाने के नाम पर रकम ली और अपने पद का दुरुपयोग कर पुलिस नियमावली व सेवा आचरण नियम 1965 का उल्लंघन किया। इस मामले में शिकायत पर विभागीय जांच 28 अक्टूबर 2024 को प्रारंभ हुई। जांच के दौरान तत्कालीन पुलिस अधीक्षक व अन्य अधिकारियों के निर्देश पर साक्ष्य और गवाहों के बयान लिए गए।

रोहिणी केन्द्र निवासी महिला प्रधान आरक्षक 942 मोनिका सोनी उर्फ मोनिका गुप्ता को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई अगस्त 2025 को पारित आदेश के तहत की गई है, जिसमें विभागीय जांच क्रमांक 19/24 के तहत मोनिका सोनी को दोषी पाते हुए यह सख्त निर्णय लिया गया।

सेवा से किया बर्खास्त

जारी आदेश में उल्लेख है कि मोनिका सोनी का यह कृत्य पुलिस बल की गरिमा और शुचिता के विपरीत है, जिससे विभाग की छवि धूमिल हुई है। ऐसे में उन्हें शासन की सेवा में बनाए रखना उचित नहीं है। विभाग ने उन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस नियमावली के प्रावधानों के तहत “सेवा से बर्खास्त की सजा दी है।

अपील कर सकती है

इसके साथ ही उनकी निलंबन अवधि 22 अगस्त 2024 से 5 जून 2025 तक की अवधि को सेवा में गणना के लिए निलंबन माना गया है। आदेश की प्रति पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज सहित संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस आदेश के विरुद्ध मोनिका सोनी 30 दिनों के भीतर पुलिस महानिरीक्षक को अपील कर सकती हैं।

समय पर नहीं प्रस्तुत किया पक्ष

एसएसपी ने बताया कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मोनिका सोनी के खिलाफ लगे आरोप प्रमाणित हैं। मोनिका को 19 जुलाई 2025 को आरोपपत्र की प्रति प्रदान की गई थी, लेकिन उन्होंने निर्धारित समय में अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद 28 जुलाई 2025 को अंतिम स्मरण पत्र भी जारी किया गया, जिसका भी कोई जवाब नहीं दिया गया।

अयोग्य माना

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन और साक्ष्यों के आधार पर यह सिद्ध हुआ कि मोनिका सोनी ने अपने पद का गंभीर दुरुपयोग करते हुए अवैध वसूली की। इस कृत्य को कदाचार और अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखते हुए उनके आचरण को पुलिस विभाग के लिए अयोग्य माना गया।

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