CG Prime News@दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय जहाज पर हमले की गंभीर घटना सामने आई है। 2 नवंबर को हुए इस हमले में गुजरात के एक भारतीय नाविक की जान चली गई, जबकि जहाज पर मौजूद अन्य 13 भारतीयों को ओमान के कोस्ट गार्ड ने सुरक्षित बचा लिया। मृतक नाविक की पहचान गांधार नाहीम अजीज के रूप में हुई है। घटना के बाद समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
MSV अल जुसुफी जहाज को बनाया गया निशाना
हमले का शिकार हुआ जहाज MSV अल जुसुफी था। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जहाज पर हमला किसने किया और इसके पीछे क्या वजह थी। हमले के तरीके को लेकर भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। घटना के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने व्यापारिक जहाजों पर हमले रोकने की मांग की है। मंत्रालय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही और व्यापार निर्बाध रूप से जारी रहना चाहिए।
अक्टूबर में 30 से ज्यादा हमलों की रिपोर्ट
ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री क्षेत्र में जहाजों पर 30 से अधिक हमले दर्ज किए गए। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद एक महीने के भीतर हमलों की यह सबसे बड़ी संख्या बताई गई है।

29 अक्टूबर को भी भारतीय क्रू वाला जहाज हुआ था प्रभावित
होर्मुज क्षेत्र में भारतीय नाविकों से जुड़े जहाज पर यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 29 अक्टूबर को पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर MT लुईस 1 को निशाना बनाया गया था। जहाज पर 27 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे। जानकारी के अनुसार, एक छोटी नाव से आए लोगों ने जहाज के बाहरी हिस्से पर दो विस्फोटक लगाए थे। कुछ समय बाद हुए धमाकों से इंजन रूम में आग लग गई और इंजन बंद हो गया। हालांकि, क्रू सदस्यों ने आग पर काबू पा लिया। सभी 27 भारतीय सुरक्षित रहे थे।
122 जहाजों पर हमले से बढ़ी समुद्री सुरक्षा की चिंता
इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के अनुसार, 28 फरवरी से 30 अक्टूबर के बीच फारस की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी में कुल 122 जहाजों पर हमले हुए।

तेल और वैश्विक कारोबार पर पड़ सकता है असर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने G20 देशों की बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने आगाह किया था कि समुद्री परिवहन में बाधा का सबसे ज्यादा असर गरीब और विकासशील देशों पर पड़ सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने के साथ महंगाई बढ़ने का खतरा भी है।
