Tuesday, November 3, 2026
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दुर्ग में सरकारी हॉस्टल में रहने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं का प्रदर्शन, अव्यवस्थाओं को लेकर खोला मोर्चा

खराब भवन, शौचालयों की बदहाल स्थिति और बुनियादी सुविधाओं की कमी से नाराज छात्र-छात्राओं ने बारिश में मालवीय चौक पर दिया धरना।

by Dakshi Sahu Rao
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दुर्ग के मालवीय चौक पर सरकारी छात्रावासों की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन करते कॉलेज के छात्र-छात्राएं।

दुर्ग में 5 से ज्यादा सरकारी हॉस्टलों के छात्रों का प्रदर्शन, भोजन भत्ता 1200 से बढ़ाकर 3000 रुपये करने की मांग

CG Prime News@दुर्ग. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सरकारी छात्रावासों की बदहाल व्यवस्था को लेकर छात्र-छात्राओं का गुस्सा सामने आया है। पांच से अधिक सरकारी हॉस्टलों के विद्यार्थियों ने अपनी समस्याओं को लेकर मालवीय चौक पर बारिश के बीच प्रदर्शन किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी उनकी शिकायतों पर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।

प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जिले के सभी सरकारी छात्रावासों की व्यवस्थाओं की जांच कराने की मांग की है। साथ ही भवन निर्माण, रखरखाव और मरम्मत के नाम पर खर्च की गई सरकारी राशि का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग उठाई है। प्रदर्शन के दौरान दो छात्राओं के बेहोश होने की भी जानकारी सामने आई है।


इन छात्रावासों के विद्यार्थियों ने उठाई आवाज

प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों में शासकीय SC बॉयज हॉस्टल मालवीय नगर, ST बॉयज हॉस्टल दुर्ग और OBC बॉयज हॉस्टल दुर्ग के छात्र शामिल बताए गए हैं। विद्यार्थियों ने आदिवासी विकास विभाग के एक अधिकारी पर भी शिकायत में आरोप लगाए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारी को पद से हटाने की मांग की है।

1200 रुपये में महीनेभर का भोजन मुश्किल

विद्यार्थियों की प्रमुख मांग छात्रावास में मिलने वाले भोजन भत्ते को बढ़ाने की है। वर्तमान में छात्रों के अनुसार भोजन के लिए प्रतिमाह 1200 रुपये दिए जाते हैं। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच इतनी कम राशि में पौष्टिक और पर्याप्त भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल है। इसलिए भोजन भत्ता बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग की गई है। छात्रों ने यह भी कहा कि कॉलेजों में पढ़ाई पूरे 12 महीने चलती है, जबकि भोजन भत्ता केवल 10 महीने का मिलता है। उन्होंने पूरे साल भोजन राशि उपलब्ध कराने की मांग रखी है।

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भवनों की मरम्मत और शौचालयों की व्यवस्था पर सवाल

छात्रों के मुताबिक कई हॉस्टलों के भवन जर्जर स्थिति में हैं। शौचालयों में साफ-सफाई और जरूरी सुविधाओं का अभाव है। विद्यार्थियों ने पलंग, टेबल, कुर्सी, चादर, लाइट, पंखे और सफाई सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है। बारिश के दौरान परिसर में जलभराव रोकने के लिए उचित ड्रेनेज व्यवस्था बनाने की बात भी कही है।

कंप्यूटर, वाई-फाई और प्रतियोगी परीक्षा की किताबें मांगीं

छात्रों ने आधुनिक शिक्षा की जरूरतों को देखते हुए हॉस्टलों में कंप्यूटर, इंटरनेट और वाई-फाई सुविधा शुरू करने की मांग की है। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकें, खेल सामग्री, वाटर प्यूरीफायर और ठंडे पानी की व्यवस्था करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

अधिकारियों ने मांगों पर विचार करने का दिया भरोसा

आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त अविनाश श्रीवास के मुताबिक, विद्यार्थियों की मांगें बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हैं। गर्मी की छुट्टियों के कारण पहले 10 महीने का भोजन खर्च दिया जाता था। अब सेमेस्टर प्रणाली लागू होने के मद्देनजर इस व्यवस्था पर विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वार्डन की नियुक्ति राज्य स्तर से होनी है और शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी कराई जाएगी।

एक साल से मरम्मत नहीं होने का आरोप

विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि करीब एक साल से छात्रावासों में बड़े स्तर पर मरम्मत और निर्माण कार्य नहीं हुए हैं, जबकि रखरखाव के नाम पर सरकारी राशि खर्च किए जाने की बात कही जाती है। छात्रों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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