Monday, November 2, 2026
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सौरभ चंद्राकर प्रत्यर्पण: महादेव ऐप का मुख्य आरोपी ओमान से भारत लाया गया

सीबीआई की टीम उसे मस्कट से लेकर आई, कल रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा

by cgprimenews.com
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सौरभ चंद्राकर प्रत्यर्पण: सीबीआई महादेव ऐप आरोपी को ओमान से भारत लाई

CG Prime News @ रायपुर। सौरभ चंद्राकर प्रत्यर्पण में सीबीआई को बड़ी सफलता मिली है। प्रत्यर्पण का मतलब है, किसी आरोपी को दूसरे देश से वापस अपने देश लाना। महादेव ऐप के अवैध सट्टा नेटवर्क के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को सीबीआई ओमान से भारत ले आई है। उसे रायपुर में सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

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सौरभ चंद्राकर पर कौन से मामले हैं?

सौरभ चंद्राकर सीबीआई के दो मामलों में वांछित है। इन दोनों मामलों में चार्जशीट (आरोपपत्र) पहले ही दाखिल हो चुकी है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक मामले में भी उसके खिलाफ केस दर्ज है। सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988, साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धाराओं और छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। सौरभ चंद्राकर इन चार्जशीट में नामजद मुख्य आरोपियों में से एक है।


क्या है महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा मामला?

छत्तीसगढ़ सरकार के कहने पर सीबीआई ने महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच में पता चला कि यह देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क में से एक था और इसे भारत के बाहर से चलाया जाता था। इसमें क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और दूसरे खेलों पर अवैध सट्टा लगाया जाता था। पूरे देश में “पैनल” और “शाखाओं” का जाल फैला हुआ था। ये लोग ग्राहकों को जोड़ते थे और उनसे सट्टे के पैसे लेते थे।

सट्टे से कमाए पैसे को बहुत सारे बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) में घुमाया जाता था और हवाला के रास्ते विदेश भेज दिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क को बिना रोक-टोक चलाने के लिए कमाई का कुछ हिस्सा सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को सुरक्षा के नाम पर दिया जाता था। प्रवर्तन निदेशालय इस नेटवर्क से जुड़ी भारत और विदेश की कई संपत्तियां जब्त (कुर्क) कर चुका है।

ओमान से कैसे हुआ सौरभ चंद्राकर प्रत्यर्पण?

सौरभ चंद्राकर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस (अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश का नोटिस) जारी था। इसी के आधार पर उसका पता लगाया गया और रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। इसके बाद सीबीआई और ईडी ने सारे सबूतों के साथ ओमान सरकार को प्रत्यर्पण का प्रस्ताव भेजा। भारत सरकार की अलग-अलग एजेंसियों और इंटरपोल के राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो ने मिलकर इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया। ओमान के अधिकारियों ने भी मदद की। मंजूरी मिलने के बाद सीबीआई की टीम मस्कट पहुंची और आरोपी को भारत लेकर आई।

सीबीआई ने ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया है। एजेंसी के मुताबिक यह सहयोग दोनों देशों की दोस्ती और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ मिलकर लड़ने के इरादे को दिखाता है। सीबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर एजेंसी की अन्य कार्रवाइयों की जानकारी मिल सकती है।

अब आगे क्या होगा?

पहले आरोपी का मेडिकल टेस्ट कराया जाएगा। फिर ट्रांजिट रिमांड (दूसरे शहर ले जाने की कोर्ट की इजाजत) मिलने के बाद उसे रायपुर ले जाया जाएगा। कल उसे सीबीआई के विशेष न्यायाधीश के सामने पेश किया जाएगा। सीबीआई ने कहा है कि विदेश में बैठकर अपराध करने वाले भगोड़ों को वापस लाकर भारतीय कानून के सामने खड़ा करने की कोशिशें लगातार जारी हैं।

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