दस्तावेज़ और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त
रायपुर/भिलाई. Major action by EOW in liquor scam probe: Raids conducted at the premises of two Bhilai-based auditors. प्रदेश के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले की जांच में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक और महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए भिलाई में ऑडिट कार्य से जुड़े दो कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने नेहरू नगर स्थित एक ऑडिट फर्म से जुड़े दो साझेदारों के कार्यालयों में कई घंटों तक तलाशी ली और वहां से बड़ी मात्रा में दस्तावेज़, वित्तीय रिकॉर्ड तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए।
अधिकारियों का मानना है कि इन डिजिटल उपकरणों से जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
ऑडिट रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की होगी गहन जांच
जानकारी के अनुसार, ईओडब्ल्यू की टीम ने तलाशी के दौरान कंप्यूटर सिस्टम, हार्ड डिस्क, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस और ऑडिट से जुड़े विभिन्न दस्तावेज़ अपने कब्जे में लिए हैं। जब्त सामग्री का तकनीकी और फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ऑडिट प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं। जांच एजेंसी रिकॉर्ड का मिलान संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय अभिलेखों से भी करेगी।

डिस्टिलरियों के ऑडिट से जुड़े हैं कारोबारी
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक संबंधित ऑडिट फर्म राज्य की एक सरकारी संस्था के माध्यम से डिस्टिलरियों के ऑडिट कार्य से जुड़ी रही है। इसी कारण जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि ऑडिट के दौरान निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या कहीं किसी स्तर पर तथ्यों को नजरअंदाज किया गया। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से पूरे मामले की कई अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं।
शराब घोटाले की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
सूत्रों के अनुसार, शराब घोटाले की जांच में अब तक कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ चुकी हैं। जांच एजेंसियां कथित अवैध शराब कारोबार, परिवहन व्यवस्था, वित्तीय लेनदेन और ऑडिट प्रक्रिया के बीच संभावित संबंधों की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं। इसी क्रम में अलग-अलग स्थानों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने लाई जा सके।

जांच पूरी होने के बाद होगी आगे की कार्रवाई
ईओडब्ल्यू अधिकारियों ने फिलहाल मामले में विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया है। एजेंसी का कहना है कि जब्त दस्तावेज़ों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। यदि जांच में किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो कानून के प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।
