Wednesday, February 11, 2026
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बस्तर पंडुम में राष्ट्रपति ने आदिवासी बालिकाओं को पढ़ाने का किया आह्वान

आदिवासियों की संस्कृति में बसती है छत्तीसगढ़ की आत्मा - राष्ट्रपति

by Dakshi Sahu Rao
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CG Prime News@जगदलपुर. President Droupadi Murmu inaugurated the Bastar Pandum festival 2026 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शनिवार सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुंचीं। जहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासियों की संस्कृति में छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरूआत की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहाँ सरकार अपनी संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजन कर रही है। यह आयोजन आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब है।

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जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही सरकार

जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित इस शुभारंभ समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी कलाकार और विशाल जनसमूह मौजूद रहा। सभी को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय उत्थान के लिए निरंतर बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान तथा नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं के जरिए जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

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आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर दिया जोर

राष्ट्रपति ने बस्तर क्षेत्र में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जनजातीय बालिकाओं को शिक्षा से जोडऩे के लिए शासन के साथ-साथ समाज और उनके माता-पिता को भी आगे आना होगा। उन्होंने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राचीन परंपराओं की जड़ें आज भी मजबूत हैं। बस्तर पंडुम जनजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। राष्ट्रपति ने बताया कि बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।

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माओवादियों की लोकतंत्री में बढ़ी आस्था

राष्ट्रपति ने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर माओवादी मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था बढ़ रही है। वर्षों से बंद विद्यालय पुन: खुल रहे हैं। दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सड़कें और पुल-पुलियों का निर्माण हो रहा है। ग्रामीणजन विकास से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की सुंदरता और संस्कृति सदैव लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है। दुर्भाग्यवश चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा, जिससे यहां के निवासियों को अनेक कष्ट झेलने पड़े।

बस्तर में विकास का सूर्योदय

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत सरकार की माओवादी आतंक के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त भय, असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं और नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आज बस्तर में विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। गाँव-गाँव में बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँच रही हैं। वर्षों से बंद विद्यालयों में अब बच्चों की कक्षाएँ फिर से संचालित हो रही हैं। राष्ट्रपति ने उपस्थित जनसमूह से अपनी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को सहेजने का आह्वान करते हुए बस्तर की जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

बस्तर पंडुम जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव- राज्यपाल डेका

राज्यपाल रमेन डेका ने शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव है। यहाँ के लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक पहनावा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन मिलकर बस्तर की सुंदर तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि गौर नृत्य, परघौनी नृत्य, धुरवा, मुरिया, लेजा जैसे नृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं।

इस प्रकार के आयोजन हमारी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोडऩे का सशक्त माध्यम हैं। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। गोंड, मुरिया, माडिय़ा, हल्बा, भतरा एवं परजा समाज के लोग पीढिय़ों से अपनी मूल परंपराओं को सहेजते आए हैं। जल, जंगल और जमीन के साथ सामंजस्य बस्तर की सबसे बड़ी ताकत है। बस्तर पंडुम के माध्यम से कलाकारों को पहचान, सम्मान और आजीविका के अवसर मिलेंगे। लोककला तभी जीवित रहेगी जब कलाकार खुशहाल होंगे।

ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान

राज्यपाल डेका ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प की मूर्तियाँ देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। यह कला जनजातीय शिल्पकारों की संस्कृति, मेहनत और कौशल का प्रमाण है। बस्तर की संस्कृति केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की लोक परंपराओं और विविधताओं का प्रतीक है।

बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद, जनजातीय समाज के लिए सम्मान और माताओं-बहनों के लिए अपनत्व है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के लिए इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन-औषधियाँ शामिल हैं, जो बस्तर की संस्कृति की जीवंतता और समृद्धि को दर्शाती हैं।

सीएम ने कहा ऐतिहासिक आगमन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका बस्तर आगमन ऐतिहासिक है। इससे कलाकारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बेटियों के सपनों को उड़ान मिलेगी। बस्तर को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर बस्तर को शांति, समृद्धि और संस्कृति का केंद्र बनाएँगे। जिस पर पूरे देश को गर्व हो। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया।

यह रहे कार्यक्रम में उपस्थित

कोंडागांव बस्तर पंडुम पर आधारित लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया। कोण्डागांव और बास्तानार के कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरणदेव सिंह, सांसद महेश कश्यप, महापौर संजय पांडे, गायता, पुजारी, मांझी-चालकी, बस्तर पंडुम के कलाकार और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।

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