दुर्ग। Appeal dismissed in cheque bounce case; accused sentenced to 10 months. चेक अनादरण यानी चेक बाउंस के एक मामले में अपीलीय न्यायालय ने आरोपी की अपील खारिज कर दी है। न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 10 माह के सश्रम कारावास और 3 लाख रुपये प्रतिकर की सजा को बरकरार रखा। अपील खारिज होने के बाद आरोपी को 25 अगस्त 2026 को जिला जेल दुर्ग भेज दिया गया।
मामला दुर्ग के शिक्षक नगर निवासी दिलीप गोलछा, पिता शोभमल गोलछा, प्रोपराइटर आयुष ट्रेडर्स से जुड़ा है। प्रकरण में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, दुर्ग ने आरोपी को चेक अनादरण के मामले में दोषी ठहराते हुए 10 माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही 3 लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया गया था। प्रतिकर राशि का भुगतान नहीं करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान भी आदेश में था।
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3 लाख रुपये उधार लेने के बाद दिया था चेक
प्रकरण के अनुसार दिलीप गोलछा ने अपनी आवश्यकता बताते हुए रमेश कुमार शर्मा से 3 लाख उधार लिए थे। रकम वापस करने के लिए आरोपी की ओर से ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, स्टेशन रोड दुर्ग शाखा का चेक दिया गया। परिवादी ने जब चेक बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया तो खाता बंद होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद परिवादी ने अपने अधिवक्ता नीरज चौबे के माध्यम से आरोपी के खिलाफ न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने आरोपी को सजा सुनाई थी।
प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायालय में दायर की थी अपील
निचली अदालत के फैसले से असंतुष्ट आरोपी ने प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, दुर्ग के न्यायालय में अपील दायर की थी। अपीलीय न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों, तथ्यों और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद आरोपी की अपील निरस्त कर दी। अदालत ने निचली अदालत के निर्णय को यथावत रखते हुए आरोपी को सजा भुगतने के लिए जेल भेजने का आदेश दिया। इसके बाद 25 अगस्त को आरोपी को जिला जेल दुर्ग भेज दिया गया।

हाईकोर्ट में राहत मांगने का विकल्प
अदालती आदेश के बाद आरोपी के पास अब उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर में याचिका दायर कर राहत मांगने का विकल्प है। जमानत या अन्य कानूनी राहत देने का निर्णय हाईकोर्ट द्वारा मामले के तथ्यों और कानून के आधार पर किया जाएगा। अपीलीय न्यायालय में परिवादी की ओर से अधिवक्ता नीरज चौबे ने आपत्ति प्रस्तुत की थी।
