दुर्ग कोर्ट का सख्त फैसला
दुर्ग। एक बेहद जघन्य अपराध के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, एफटीसी कोर्ट के न्यायाधीश अवध किशोर ने आरोपी पुत्र को कड़ी सजा सुनाई है। न्यायालय ने प्रकरण क्रमांक 334/2025 में अपनी ही मां के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को दोषी ठहराते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (2)(f) के तहत 25 वर्ष की सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को 15 दिन का अतिरिक्त सामान्य कारावास भुगतना होगा। (Son sentenced to 25 years rigorous imprisonment for raping his mother)
घटना 23 अगस्त 2025 की रात की
अपर लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह ने बताया कि घटना 23 अगस्त 2025 की रात लगभग 12 बजे की है। आरोपी ने अपनी मां के कमरे का दरवाजा खटखटाया। दरवाजा खुलते ही उसने महिला के साथ गाली-गलौज की और उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।
घटना के बाद पीड़िता किसी तरह वहां से भागकर पड़ोसी के घर पहुंची और वहां शरण ली।
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पति के लौटने पर दर्ज हुई रिपोर्ट
अगली सुबह जब पीड़िता का पति ड्यूटी से घर लौटा तो महिला ने पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद वह अपने पति, बेटी और दूसरे बेटे के साथ थाने पहुंची और आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया।
अदालत में आरोपी ने भी स्वीकार किया अपराध
सुनवाई के दौरान न्यायालय में प्रस्तुत सभी साक्षियों ने आरोपी के खिलाफ बयान दिए। वहीं आरोपी ने अपने मुल्जिम बयान में भी अपराध स्वीकार कर लिया। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 25 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 (2) के तहत 6 माह के सश्रम कारावास से भी दंडित किया है। अदालत के इस फैसले को गंभीर अपराधों के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है।
