सड़क सुरक्षा पर उच्चस्तरीय समीक्षा
दुर्ग। वर्ष 2026 को लक्ष्य बनाकर सड़क दुर्घटनाओं में शून्य मृत्यु के उद्देश्य से ‘जीरो विजन’ अभियान को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री अभय मनोहर सप्रे ने दिए। वे सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष हैं। लोक निर्माण विभाग के सभाकक्ष में दुर्ग संभाग की सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। (Road safety campaign intensified in Durg division with the target of ‘Zero Vision’ by 2026)
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आंकड़ों की समीक्षा, ठोस कदमों पर जोर
न्यायमूर्ति सप्रे ने वर्ष 2024 और 2025 के सड़क दुर्घटना, मृत्यु व घायलों के आंकड़ों की तुलनात्मक समीक्षा करते हुए कहा कि दोनों वर्षों की स्थिति लगभग समान है, जो चिंताजनक है। उन्होंने ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
जनभागीदारी और जागरूकता अनिवार्य
उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए जनभागीदारी सबसे अहम है। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर हेलमेट, सीटबेल्ट, गति नियंत्रण, यातायात नियमों के पालन और नशे में वाहन न चलाने को लेकर व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।
कड़ी चालानी कार्रवाई के निर्देश
हेलमेट और सीटबेल्ट के अभाव को सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु का प्रमुख कारण बताते हुए न्यायमूर्ति सप्रे ने बिना हेलमेट, बिना सीटबेल्ट और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही वाहन बीमा, फिटनेस और ड्राइविंग लाइसेंस की नियमित जांच पर जोर दिया।
उत्कृष्ट कार्यों को मिला सम्मान
सड़क सुरक्षा अभियान 2025 के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अलावा जनजागरूकता के लिए हेलमेट बाइक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।