Thursday, January 15, 2026
Home » Blog » प्रिज्म कॉलेज फीस गबन मामला: न्यायालय के आदेश पर उतई थाने में FIR

प्रिज्म कॉलेज फीस गबन मामला: न्यायालय के आदेश पर उतई थाने में FIR

करीब साढ़े तीन लाख की धोखाधड़ी, जांच के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी संभव

by cgprimenews.com
0 comments
प्रिज्म कॉलेज ऑफ फार्मेसी फीस गबन मामले में उतई थाना पुलिस की कार्रवाई

भिलाई। उतई स्थित महेकाखुर्द के प्रिज्म कॉलेज ऑफ फार्मेसी से जुड़े बहुचर्चित फीस गबन मामले में आखिरकार पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कामिनी जायसवाल के आदेश के पालन में थाना उतई पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है।

न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुआ अपराध

न्यायालय द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत पारित आदेश के बाद थाना उतई में आरोपियों के विरुद्ध धारा 316 एवं 3(5) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रकरण की विवेचना के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फीस वसूली कर निजी खातों में जमा करने का आरोप

उतई थाना प्रभारी महेश ध्रुव ने बताया कि प्रिज्म कॉलेज ऑफ फार्मेसी की प्राचार्य सीमा कश्यप द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद में आरोप लगाया गया था कि कॉलेज में पदस्थ असिस्टेंट प्रोफेसर सागर शर्मा और उनकी पत्नी गुरदीप कौर शर्मा ने सत्र 2023 एवं 2024 के विद्यार्थियों से कॉलेज फीस वसूली, लेकिन राशि कॉलेज खाते में जमा न कर स्वयं एवं परिजनों के खातों में रख ली।

करीब 3.45 लाख रुपये की ठगी

परिवाद के अनुसार, सत्र 2023 में छह विद्यार्थियों से प्रति विद्यार्थी 20 हजार रुपये नकद तथा सत्र 2024 में छह विद्यार्थियों से यूपीआई के माध्यम से फीस ली गई। इस तरह कुल लगभग 3 लाख 45 हजार रुपये की राशि का गबन किया गया।

फीस मांगने पर हुआ मामले का खुलासा

टीआई ने बताया कि फरवरी 2025 में जब कॉलेज प्रबंधन ने विद्यार्थियों से फीस जमा करने को कहा, तब इस अनियमितता का खुलासा हुआ। इसके बाद तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति गठित की गई, जिसने 24 फरवरी 2025 को अपनी रिपोर्ट में आरोपियों को दोषी पाया।

आंशिक राशि लौटाई, FIR के लिए जाना पड़ा न्यायालय

जांच के बाद आरोपियों को राशि लौटाने के निर्देश दिए गए, लेकिन उन्होंने केवल 1 लाख 95 हजार रुपये ही जमा किए। शेष राशि वापस नहीं करने पर कॉलेज प्रबंधन ने 6 मार्च 2025 को थाना उतई और 12 मई 2025 को पुलिस अधीक्षक दुर्ग को शिकायत दी। एफआईआर दर्ज न होने पर मामला न्यायालय पहुंचा, जहां से अपराध पंजीबद्ध करने का आदेश दिया गया।+

You may also like