भिलाई | नाबालिग से दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले में पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर भी सवाल गहराते जा रहे हैं। आरोप है कि नाबालिग पीड़िता के साथ दुर्ग और उतई स्थित सरकारी विश्राम गृह में दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। दो दिवस की पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से पूछताछ की गई और पुलिस टीम ने घटनास्थलों का पुनः निरीक्षण किया। (Rape of a minor in Durg and Utai rest house, on whose influence did the rooms get)
फरार आरोपियों ने किया आत्मसमर्पण
इस प्रकरण में फरार चल रहे रसूखदार आरोपी भीमनारायण पांडे और संजय पंडित ने 13 फरवरी को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। न्यायालय की अनुमति के बाद पुलिस ने दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर दो दिन की रिमांड प्राप्त की। रिमांड अवधि में पूछताछ के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त दो कार और मोबाइल फोन जब्त किए गए।
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घटनास्थलों का निरीक्षण, वीडियोग्राफी
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर दुर्ग और उतई के विश्राम गृह सहित अन्य संबंधित स्थानों का गवाहों की मौजूदगी में निरीक्षण कराया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई, ताकि विवेचना में किसी तरह की तकनीकी कमी न रह जाए। रिमांड पूरी होने के बाद रविवार को दोनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया।
विश्राम गृह देने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रसूखदार आरोपियों को अलग-अलग क्षेत्रों में सरकारी विश्राम गृह आखिर किसने उपलब्ध कराए? विश्राम गृह में कक्ष आवंटन की जिम्मेदारी तय अधिकारियों की होती है, फिर नाबालिग से दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध के लिए कक्ष कैसे दिए गए? क्या आम नागरिकों को भी इतनी आसानी से विश्राम गृह मिल जाते हैं, या नियम केवल प्रभावशाली लोगों के लिए बदले जाते हैं?
निजी होटल बनाम सरकारी विश्राम गृह
इन आरोपियों ने उसी नाबालिग के साथ यही घटना एक निजी होटल में की। पुलिस ने होटल मैनेजर और जिम्मेदार व्यक्ति को तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाता। फिर सरकारी विश्राम गृह में कक्ष देने वाले अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या दुर्ग पुलिस इस दिशा में भी जांच करेगी, या मामला केवल आरोपियों तक सीमित रह जाएगा?
