CG Prime News@भिलाई. सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) अब अपने नवाचार और ब्रांड को कानूनी सुरक्षा देकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती से कदम रख सकेंगे। रुंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी में स्थापित एमएसएमई फैसिलिटेशन सेंटर द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में उद्यमियों को पेटेंट, ट्रेडमार्क और अन्य बौद्धिक संपदा अधिकारों की जानकारी दी गई।
पेटेंट और ट्रेडमार्क पर आर्थिक सहायता
रुंगटा बिजनेस इनक्यूबेशन के सीईओ जी. वेणुगोपाल ने बताया कि सरकार की योजनाओं के तहत उद्यमियों को ट्रेडमार्क पंजीयन पर 10 हजार रुपये, भारत में पेटेंट पंजीयन पर 1 लाख रुपये तथा विदेश में पेटेंट पर 5 लाख रुपये तक की राशि वापस मिल सकती है। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया में निःशुल्क मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा।
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47 लाख के अनुदान से स्थापित केंद्र
एमएसएमई फैसिलिटेशन सेंटर के प्रवक्ता डॉ. रामकृष्ण राठौर ने बताया कि केंद्र सरकार की नवाचार योजना के अंतर्गत लगभग 47 लाख रुपये के अनुदान से यह केंद्र स्थापित किया गया है। यह केंद्र स्टार्टअप, नवप्रवर्तकों और उद्योगों को पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, औद्योगिक डिजाइन और भौगोलिक संकेतक (GI) पंजीयन में सहायता प्रदान करेगा।
उद्योगों को मिलेगा प्रतिस्पर्धात्मक लाभ
मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के राज्य महासचिव अजय भसीन ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार लेने से उद्योगों को नकल और अवैध प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा मिलती है। इससे ब्रांड की विश्वसनीयता बढ़ती है और निवेश आकर्षित होता है। उन्होंने संभाग के सभी उद्यमियों से नवाचार को सुरक्षित करने की अपील की।
महिला उद्यमी का सम्मान
कार्यक्रम में महिला उद्यमी सरोज देवी (सरोज स्टील्स) को सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि ट्रेडमार्क पंजीयन से ब्रांड को अलग पहचान मिलती है और बाजार में भरोसा कायम रहता है। कार्यक्रम में चार तकनीकी सत्र आयोजित हुए, जिनमें पेटेंट और ट्रेडमार्क प्रक्रिया, तकनीकी सुविधाएं और सफल उद्योग की कहानियां साझा की गईं। दुर्ग-भिलाई सहित आसपास के क्षेत्रों से 70 से अधिक उद्यमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समन्वय अनुराग शर्मा ने किया।
