Home » Blog » लोकसभा में 20 साल बाद प्रधानमंत्री के भाषण के बिना धन्यवाद प्रस्ताव पास

लोकसभा में 20 साल बाद प्रधानमंत्री के भाषण के बिना धन्यवाद प्रस्ताव पास

लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी गुरुवार को जमकर हंगामा हुआ

by Dakshi Sahu Rao
0 comments
cg prime news

CG Prime News@दिल्ली. LOK Sabha budget session 2026 लोकसभा में गुरुवार को बजट सत्र के 7वें दिन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव हंगामे के बीच पास हो गया। गुरुवार को लोकसभा शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की। इस पर स्पीकर ने पहली बार 65 सेकंड के भीतर, दूसरी बार 5 मिनट में और तीसरी बार 2 मिनट में कार्यवाही स्थगित कर दी। लोकसभा 3 बजे दोबारा शुरू हुई।

विपक्ष ने कहा सदन में बोलने नहीं देंगे पीएम को

2004 के बाद पहली बार है जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री (pm narendra modi) के भाषण के बिना पास हुआ है। इससे पहले 10 जून 2004 को विपक्ष ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को धन्यवाद प्रस्ताव पर नहीं बोलने दिया था। इस बीच कांग्रेस के लोकसभा से निलंबित सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि जब तक लोकसभा में राहुल गांधी को अपनी बात रखने की इजाजत नहीं दी जाती, तब तक विपक्ष पीएम नरेंद्र मोदी को सदन में बोलने नहीं देगा।

राज्यसभा में भी हुआ हंगामा

इधर लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी गुरुवार को जमकर हंगामा हुआ। हंगामे के बाद विपक्षी सांसद राज्यसभा से वॉकआउट कर गए। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक प्रधानमंत्री आज शाम 5 बजे राज्यसभा में भाषण दे सकते हैं। राज्यसभा में भी राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने से रोकने के मुद्दे पर हंगामा हुआ। मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा कि राहुल को पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब पर नहीं बोलने दिया, मैं उस पर यहां बोलूंगा। इस पर उपसभापति ने उन्हें रोक दिया। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने खडग़े से कहा- राहुल गांधी नियम नहीं मानते, आप उन्हें समझाते क्यों नहीं। जेपी नड्डा ने भी खडग़े से कहा कि राज्यसभा में लोकसभा का मुद्दा नहीं उठा सकते। आप कांग्रेस को अबोध बालक का बंधक न बनने दें।

RJD सांसद मनोज झा ने कहा- सरकार चेहरा छिपाने पर मजबूर

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के विपक्ष के नेता राहुल गांधी को ‘अबोध बालक’ कहने पर RJD सांसद मनोज झा ने कहा- असली मुद्दा यह है कि (जो किताब अभी रिलीज नहीं हुई है) उस किताब ने सरकार को अपना चेहरा छिपाने पर मजबूर कर दिया है। क्या हमने पहले कभी ऐसी स्थिति देखी है, जहां राष्ट्रपति के भाषण पर कोई चर्चा नहीं हुई हो? प्रधानमंत्री बोल नहीं पाए। जो व्यक्ति आमतौर पर बोलने के लिए इतना उत्सुक रहता है, उसे इस बार मौका नहीं मिला, क्योंकि उस किताब ने कुछ सच सामने ला दिए। जहां तक नड्डा जी और दूसरे लोग जो कह रहे हैं, वे और क्या कर सकते हैं। उनकी स्क्रिप्ट और शब्द सीमित हैं। नड्डा आलोचना के लिए बेहतर शब्दों का इस्तेमाल कर सकते थे, लेकिन मैं समझता हूं कि शब्दों की कमी राजनीतिक संकीर्ण सोच की निशानी है।

 

You may also like