Monday, August 3, 2026
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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: भिलाई में दो ऑडिटरों के ठिकानों पर EOW की रेड

नेहरू नगर स्थित ऑडिट फर्म के साझेदारों के कार्यालयों में घंटों चली जांच, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच होगी।

by cgprimenews.com
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भिलाई में शराब घोटाला जांच के दौरान ऑडिट फर्म में ईओडब्ल्यू की जांच करती टीम।

दस्तावेज़ और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त

रायपुर/भिलाई। Major action in liquor scam probe: EOW raids premises of two auditors in Bhilai. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भिलाई के नेहरू नगर स्थित एक ऑडिट फर्म से जुड़े दो साझेदारों अजय सोमानी और प्रदीप पाल के कार्यालयों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान टीम ने ऑडिट से संबंधित दस्तावेज़, वित्तीय अभिलेख, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

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ऑडिट रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा पर जांच का फोकस

जानकारी के अनुसार, संबंधित ऑडिट फर्म राज्य की एक सरकारी संस्था के माध्यम से डिस्टिलरियों के ऑडिट कार्य से जुड़ी रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ऑडिट प्रक्रिया निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप हुई थी या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं या रिकॉर्ड में संभावित गड़बड़ियों को नजरअंदाज तो नहीं किया गया।


फॉरेंसिक जांच से खुल सकते हैं नए तथ्य

ईओडब्ल्यू ने जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों को तकनीकी जांच के लिए सुरक्षित रखा है। अधिकारियों के अनुसार, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक डेटा का फॉरेंसिक विश्लेषण कर दस्तावेज़ों, ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। इससे जांच में महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिलने की संभावना जताई जा रही है।

जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा

सूत्रों के मुताबिक, शराब घोटाले की जांच के दौरान पहले भी कई अहम जानकारियां सामने आ चुकी हैं। जांच एजेंसियां कथित अवैध शराब कारोबार, परिवहन व्यवस्था, वित्तीय लेनदेन और ऑडिट प्रक्रिया के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही हैं। इसी कड़ी में विभिन्न स्थानों पर दस्तावेज़ों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच जारी है।

अधिकारियों ने क्या कहा

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जब्त सामग्री का परीक्षण पूरा होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। यदि जांच के दौरान किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल एजेंसी ने मामले पर विस्तृत आधिकारिक टिप्पणी करने से परहेज किया है और जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।

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