Saturday, March 21, 2026
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अमेरिका इजराइल ने ईरान के नतांज न्यूक्लियर सेंटर पर किया हवाई हमला

ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया आइलैंड पर ईरानी हमले की निंदा की

by Dakshi Sahu Rao
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CG Prime News@दिल्ली. अमेरिका-इजराइल ने मिलकर ईरान के नतांज न्यूक्लियर सेंटर पर हवाई हमला कर दिया है। ईरान के तसनीम न्यूज एजेंसी ने हमले की पुष्टि की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हमले में अभी तक किसी भी तरह का रेडियोएक्टिव (खतरनाक परमाणु) रिसाव नहीं हुआ है। इस इलाके के आसपास रहने वाले लोगों को कोई खतरा नहीं है।

जंग का 22 वां दिन

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 22वां दिन है। नतांज न्यूक्लियर सेंटर ईरान का सबसे बड़ा न्यूक्लियर सेंटर है। यहां यूरेनियम इनरिचमेंट किया जाता है। इसकी एक खास बात यह है कि इसका बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे बना हुआ है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि किसी हमले से इसे बचाया जा सके।

ईरान का दावा- इजराइली एयरपोर्ट पर हमला किया

ईरान की सेना इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उसने इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर ड्रोन से हमला किया है। उनका कहना है कि इस हमले से एयरपोर्ट का काम प्रभावित हुआ है। उड़ानें और सेना के विमानों में ईंधन भरने में दिक्कत आई है। हालांकि, अभी तक इस हमले की पुष्टि नहीं हुई है।

ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया आइलैंड पर ईरानी हमले की निंदा की

ब्रिटेन ने उसके डिएगो गार्सिया आइलैंड पर ईरानी हमले की निंदा की है। ब्रिटेन का कहना है कि ईरान की ऐसी हरकतें इलाके के लिए खतरा हैं। हालांकि ये हमला कामयाब नहीं हुआ। ब्रिटेन इस लड़ाई में खुद सीधे शामिल नहीं है, लेकिन उसने अमेरिका को अपने बेस इस्तेमाल करने दिए हैं। ईरान पर हमले के लिए डिएगो गार्सिया इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि यह हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित एक बड़ा सैन्य ठिकाना है। यहां से अमेरिका दूर तक और तेजी से सैन्य ऑपरेशन चला सकता है। यह ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 3,800 किलोमीटर दूर है। इतनी दूरी होने के कारण अमेरिका यहां से बिना सीधे खतरे के दायरे में आए लंबी दूरी के मिशन लॉन्च कर सकता है।

अमेरिका बोला– तेल बेचकर भी ईरान को ज्यादा फायदा नहीं

अमेरिका ने कहा है कि ईरान को तेल बेचने की इजाजत देने के बाद भी उसे ज्यादा पैसा नहीं मिलेगा। अमेरिका ने कुछ समय के लिए करीब 14 करोड़ बैरल तेल बेचने की छूट दी है, लेकिन यह सिर्फ उस तेल पर लागू है जो पहले से जहाजों में भरा हुआ है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बसेंट ने कहा कि ईरान के लिए इस पैसे तक पहुंच पाना मुश्किल होगा। यह छूट सिर्फ थोड़े समय के लिए है और 19 अप्रैल तक ही लागू रहेगी। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि तेल की बढ़ती कीमतों को कम किया जा सके, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव की वजह से सप्लाई पर असर पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान का ज्यादातर तेल चीन जाता है, लेकिन अब यह तेल दूसरे एशियाई देशों में भी जा सकता है।

 

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