अब आयकर विभाग की जांच में फंसी रकम
भिलाई। Legal crackdown on ₹4 crore in cash; firm’s claim rejected. खुर्सीपार पुलिस द्वारा जब्त की गई 4 करोड़ रुपये की नकदी का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। रकम के मालिकाना हक को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। वहीं, आयकर विभाग की जांच ने भी मामले को और गंभीर बना दिया है। मेकटेक फर्म के संचालक कमलेश रजनीकांत शाह ने नकदी को अपनी फर्म की व्यावसायिक पूंजी बताते हुए न्यायालय से वापस मांगा था। हालांकि, न्यायालय ने उनका सुपुर्दनामा आवेदन निरस्त कर दिया। दूसरी ओर, आयकर विभाग ने जांच पूरी होने तक रकम किसी को भी नहीं सौंपने का आग्रह किया है।
यह भी पढ़ेः भिलाई में फर्जी मैरिज ब्यूरो का भंडाफोड़, AI से लड़कियों की तस्वीरें बनाकर देशभर में ठगी
वाहन से बरामद हुई थी करोड़ों की नकदी
न्यायालयीन दस्तावेजों के अनुसार, 25 अक्टूबर 2026 को खुर्सीपार पुलिस ने वाहन क्रमांक CG-04-QU-5996 से 4 करोड़ रुपये नकद जब्त किए थे। यह वाहन भावेश भाई डाभी और विष्णुदेव दुबे के आधिपत्य में बताया गया है। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 106 के तहत कार्रवाई की थी। बताया गया कि वाहन रायपुर से नागपुर की ओर जा रहा था। शुरुआती पूछताछ में नकदी का संबंध ट्रांसपोर्ट कारोबार से बताया गया। इसके बाद मेकटेक फर्म के संचालक ने रकम पर अपना दावा पेश किया।

आयकर विभाग ने कोर्ट को भेजे दो पत्र
इस मामले में आयकर विभाग ने 26 और 29 अक्टूबर 2026 को न्यायालय को पत्र भेजे। डीडीआईटी/एडीआईटी (इन्वेस्टिगेशन)-3, रायपुर की ओर से 29 अक्टूबर को विस्तृत जानकारी भी प्रस्तुत की गई। विभाग ने नकदी के स्रोत और स्वामित्व की जांच शुरू कर दी है। साथ ही, जांच पूरी होने और प्रकरण का निराकरण होने तक रकम किसी व्यक्ति को सुपुर्दनामा पर नहीं देने का अनुरोध किया है।
हाईकोर्ट के फैसलों का भी दिया गया हवाला
कमलेश शाह की ओर से प्रस्तुत आवेदन में सुप्रीम कोर्ट के सुंदरभाई अंबालाल देसाई बनाम गुजरात राज्य मामले सहित विभिन्न न्यायालयों के फैसलों का उल्लेख किया गया। इनमें कर्नाटक, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के प्रकरण भी शामिल हैं। हालांकि, न्यायालयीन दस्तावेजों में आयकर विभाग के पत्रों और केस डायरी के अवलोकन के बाद सुपुर्दनामा आवेदन निरस्त होने का उल्लेख है।

आखिर किसकी है 4 करोड़ की नकदी?
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल नकदी के वास्तविक मालिक और उसके स्रोत को लेकर है। आखिर 4 करोड़ रुपये किस कारोबारी लेनदेन के तहत ले जाए जा रहे थे? रकम किसने भेजी और किसे मिलनी थी? क्या इसके समर्थन में पर्याप्त कारोबारी और वित्तीय दस्तावेज मौजूद हैं? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल पुलिस की जब्ती, फर्म के दावे और आयकर विभाग की जांच के बीच 4 करोड़ रुपये की नकदी न्यायालयीन प्रक्रिया में उलझी हुई है। अब सबकी निगाहें आयकर विभाग की जांच रिपोर्ट और न्यायालय के आगामी आदेश पर टिकी हैं।
