Monday, August 3, 2026
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भिलाई निगम की पार्षद रीता सिंह समेत तीन पर धोखाधड़ी का केस दर्ज

जेएमएफसी पाटन के आदेश पर उतई थाना पुलिस ने दर्ज किया मामला, भूमि, खनन संपत्ति और भारी वाहनों के सौदे में तथ्यों को छिपाने का आरोप

by cgprimenews.com
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भिलाई नगर निगम पार्षद रीता सिंह के खिलाफ 4.39 करोड़ रुपये के कथित भूमि सौदे में दर्ज एफआईआर से संबंधित सांकेतिक तस्वीर।

4.39 करोड़ के भूमि सौदे में एफआईआर दर्ज

भिलाई/दुर्ग। Fraud case registered against three people, including Bhilai Municipal Corporation Councilor Rita Singh.भिलाई नगर निगम की पार्षद रीता सिंह, उनके पति रमेशचंद सिंह राजपूत और पुत्र मानवचंद सिंह के खिलाफ कथित धोखाधड़ी के मामले में उतई थाना पुलिस ने न्यायालय के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला लगभग 4.39 करोड़ रुपये के भूमि एवं खनन संपत्ति के लेनदेन से जुड़ा बताया गया है। पुलिस ने कहा है कि प्रकरण की विस्तृत विवेचना जारी है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुई एफआईआर

पुलिस के अनुसार, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) पाटन ने 31 जुलाई 2026 को परिवादी बीबी सिंह की ओर से प्रस्तुत आवेदन पर सुनवाई के बाद उतई थाना प्रभारी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 318(2), 318(3), 318(4), 338, 336(3) और 340 के तहत अपराध दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसी आदेश के अनुपालन में पुलिस ने मामला पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है।


4.50 करोड़ के सौदे में 4.39 करोड़ भुगतान का दावा

परिवादी के आवेदन के अनुसार, 29 जनवरी 2024 को ग्राम छांटा, तहसील पाटन स्थित खदान, संबंधित भूमि, टाटा हिटाची मशीन और भारत बेंज टिपर वाहनों के विक्रय को लेकर दोनों पक्षों के बीच इकरारनामा हुआ था। कुल सौदा 4.50 करोड़ रुपये में तय हुआ, जिसमें से 4.39 करोड़ रुपये भुगतान किए जाने का दावा किया गया है।

परिवादी का आरोप है कि सौदे के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी नहीं दी गई। शिकायत में कहा गया है कि जिन भूमि खसरों का सौदा किया गया, उनमें कुछ पहले से अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज थीं, जबकि कुछ भूमि ऐसी श्रेणी की थीं जिनका विधिक रूप से विक्रय संभव नहीं था। साथ ही कुछ संपत्तियां बैंक में बंधक होने के बावजूद उनकी वास्तविक स्थिति की जानकारी साझा नहीं की गई।

दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने का भी आरोप

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बैंक की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी), खनन पट्टा और अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय तक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी आधार पर परिवादी ने अपने साथ धोखाधड़ी होने का आरोप लगाया है।

पहले शिकायत, फिर कोर्ट का दरवाजा

परिवादी का कहना है कि फरवरी 2026 में उतई थाना और दुर्ग पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित शिकायत देने के बावजूद मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेजों और पुलिस प्रतिवेदन का परीक्षण करने के बाद एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एफआईआर दर्ज होना आरोपों की प्रारंभिक कानूनी प्रक्रिया है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।


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