CG Prime News@रायपुर. Chhattisgarh Assembly’s monsoon session to begin on July 13 छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई 2026 से शुरू होगा। विधानसभा सचिवालय ने सोमवार को इसकी अधिसूचना और कार्यसूची जारी कर दी है। पांच दिनों तक चलने वाला यह सत्र 17 जुलाई तक आयोजित होगा, जिसमें कुल पांच बैठकें प्रस्तावित हैं। सत्र के दौरान प्रश्नोत्तर काल, शासकीय कार्यों के साथ-साथ वित्तीय मामलों पर भी चर्चा की जाएगी।
पहले चार दिन प्रश्नोत्तर और शासकीय कार्य
जारी कार्यक्रम के अनुसार 13 जुलाई से 16 जुलाई तक प्रश्नोत्तर काल और विभिन्न शासकीय कार्यों पर चर्चा होगी। वहीं 17 जुलाई को प्रश्नोत्तर और शासकीय कार्यों के साथ गैर-शासकीय कार्य भी लिए जाएंगे। राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कई समसामयिक मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना है।
कानून-व्यवस्था और शिक्षा के मुद्दे रहेंगे केंद्र में
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बिजली-पानी की उपलब्धता, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं सहित विभिन्न विभागों में लिए गए विवादित निर्णयों को लेकर सरकार से जवाब मांग सकता है। हाल ही में स्कूलों में मंत्र-पाठ से जुड़े निर्देशों को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हुई है, जिसका असर विधानसभा की कार्यवाही में देखने को मिल सकता है। इसके अलावा हसदेव क्षेत्र में जंगल कटाई, शराब दुकानों में कथित ओवररेटिंग, नगरीय निकायों से जुड़े मुद्दे और किसानों की मांगें भी सदन में प्रमुखता से उठ सकती हैं।


छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई से, 5 बैठकें होंगी
सरकार उपलब्धियों और योजनाओं का रखेगी ब्यौरा
दूसरी ओर राज्य सरकार अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और विभिन्न विभागों की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण सदन के पटल पर रखने की तैयारी कर रही है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार सत्र में वित्तीय कार्यों के साथ अन्य महत्वपूर्ण शासकीय कार्य भी संपादित किए जाएंगे। सत्र की अवधि केवल पांच दिन निर्धारित किए जाने के कारण विपक्ष की ओर से इसकी अवधि बढ़ाने की मांग भी उठ सकती है।
बजट सत्र में पारित हुए थे महत्वपूर्ण विधेयक
गौरतलब है कि इससे पहले आयोजित बजट सत्र में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 को सदन की मंजूरी मिली थी। इस कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों में दोषी पाए जाने पर सात से दस वर्ष तक की सजा और न्यूनतम पांच लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने संबंधी विधेयक और स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड विधेयक-2026 भी पारित किए गए थे। इन कानूनों का उद्देश्य भर्ती और परीक्षा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता तथा निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
