Wednesday, February 25, 2026
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कांकेर में दो माओवादी कैडर ने किया आत्मसमर्पण

उत्तर बस्तर डिवीजन कमेटी से जुड़े डीवीसीएम मल्लेश और रानू पोडियाम ने हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने का लिया निर्णय, पुनर्वास प्रक्रिया शुरू

by cgprimenews.com
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कांकेर में माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण के दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ चर्चा करते सुरक्षा बल।

कांकेर। जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। Communist Party of India (Maoist) के उत्तर बस्तर डिवीजन कमेटी से जुड़े दो सक्रिय माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में डीवीसीएम मल्लेश एवं पार्टी सदस्य रानू पोडियाम शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने बताया कि दोनों कैडरों ने हाल ही में कांकेर पुलिस एवं Border Security Force (BSF) के अधिकारियों से संपर्क कर आत्मसमर्पण और पुनर्वास के लिए स्वयं आगे आकर विश्वास जताया है। यह कदम क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रहे अन्य कैडरों को

पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले दोनों माओवादी कैडर अब इलाके में सक्रिय अन्य सदस्यों से संपर्क स्थापित कर उन्हें भी हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों में कमी आएगी।

पूरी प्रक्रिया के बाद होगी औपचारिक हथियार सुपुर्दगी

प्रशासन द्वारा बताया गया कि आत्मसमर्पण की निर्धारित प्रक्रिया के तहत सामाजिक पुनर्वास, दस्तावेजी औपचारिकताएं एवं हथियारों की सुपुर्दगी की कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। सभी प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

आईजी बस्तर ने की अपील

पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज सुन्दरराज पट्टलिंगम ने माओवादी कैडरों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन अपनाना चाहते हैं, उन्हें सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सुरक्षा, आर्थिक सहायता और सम्मानजनक जीवन के अवसर प्रदान किए जाएंगे।

पुनर्वास नीति से बढ़ा भरोसा

पुलिस के अनुसार पिछले 24 महीनों में 2400 से अधिक माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। यह आंकड़ा राज्य सरकार की पुनर्वास नीति की प्रभावशीलता को दर्शाता है और बस्तर क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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