दुर्ग। छत्तीसगढ़ शासन ने सुशासन, पारदर्शिता और परिणामोन्मुख प्रशासन को सुदृढ़ करने के लिए दुर्ग जिले में आईगोट (iGOT) कर्मयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम कलेक्टर सभा कक्ष में सायं 4:00 से 6:00 बजे तक संपन्न हुआ। इसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला स्तरीय अधिकारी और नोडल अधिकारी शामिल हुए।
संभागायुक्त और कलेक्टर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण
कार्यक्रम का संचालन संभागायुक्त दुर्ग संभाग, सत्य नारायण राठौर, और कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, अभिजीत सिंह, के नेतृत्व में किया गया। प्रशिक्षण सत्र में आईगोट (iGOT) प्लेटफॉर्म की संरचना, भूमिका आधारित मॉड्यूल, स्व-आकलन प्रणाली और डिजिटल शिक्षण की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई।
‘मिशन कर्मयोगी’ का उद्देश्य
सत्र में यह स्पष्ट किया गया कि ‘मिशन कर्मयोगी’ केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाने का राष्ट्रीय अभियान है। इसके माध्यम से अधिकारी अपने दायित्वों के अनुरूप लगातार क्षमता निर्माण कर सकते हैं, जिससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और नागरिक संतुष्टि सुनिश्चित होगी।
सतत सीखने की संस्कृति को बढ़ावा
संभागायुक्त राठौर ने कहा कि बदलते प्रशासनिक परिवेश में सतत सीखने की संस्कृति अत्यंत आवश्यक है। आईगोट (iGOT) प्लेटफॉर्म अधिकारियों को स्वयं को अद्यतन रखने और कार्यकुशलता बढ़ाने का सशक्त माध्यम प्रदान करता है।
डिजिटल प्रशिक्षण से उत्कृष्ट कार्यप्रदर्शन
कलेक्टर अभिजीत सिंह ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण मॉड्यूल का नियमित अध्ययन करें और अपने-अपने विभागों में उत्कृष्ट कार्यप्रदर्शन सुनिश्चित करें। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित प्रशिक्षण को भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था की आधारशिला बताया।
अनुभव साझा और विचार-विमर्श
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और प्रशासनिक सुधार, सेवा गुणवत्ता और डिजिटल गवर्नेंस के विस्तार पर चर्चा की।
