Wednesday, February 11, 2026
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दुर्ग नवनियुक्त IG अभिषेक शांडिल्य ने ली पुलिस अधिकारियों की बैठक

थाना प्रभारियों को स्वयं एफआईआर दर्ज करने, लंबित अपराधों के शीघ्र निराकरण और कर्मचारियों पर सख़्त नियंत्रण के निर्देश

by cgprimenews.com
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दुर्ग। दुर्ग रेंज के नवनियुक्त पुलिस महानिरीक्षक अभिषेक शांडिल्य ने 27 जनवरी 2026 को दोपहर 12 बजे पुलिस नियंत्रण कक्ष भिलाई में जिले के समस्त राजपत्रित अधिकारियों एवं थाना और चौकी प्रभारियों की प्रथम बैठक ली। बैठक में पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। बैठक में डीआईजी विजय अग्रवाल उपस्थित रहे। (Durg’s newly appointed IG Abhishek Shandilya held a meeting with police officers.)

पुलिस महानिरीक्षक ने जिले के सभी राजपत्रित अधिकारियों, थाना एवं चौकी प्रभारियों से परिचय किया। इसके बाद अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस की छवि सीधे तौर पर अधीनस्थ कर्मचारियों के आचरण एवं व्यवहार से जुड़ी होती है, इसलिए सभी थाना प्रभारी अपने अधीनस्थ स्टाफ के कार्य एवं गतिविधियों पर सतत निगरानी रखें और प्रभावी नियंत्रण बनाए रखें।

वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताई

पुलिस महानिरीक्षक ने वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि शहर के व्यावसायिक संस्थानों में संचालित संभावित संदिग्ध कंपनियों एवं संस्थाओं की पहचान कर उनका सर्वे, लिस्टिंग एवं लुभावने विज्ञापनों और योजनाओं की जानकारी थाना स्तर पर एकत्र की जाए, ताकि आम नागरिकों को ठगी से बचाया जा सके।

फरियादियों की सूने और दर्ज करें अपराध

उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि महत्वपूर्ण संपत्ति संबंधी एवं शरीर संबंधी अपराधों में एफआईआर अनिवार्य रूप से थाना प्रभारी स्वयं दर्ज करें, विशेषकर वित्तीय धोखाधड़ी एवं गंभीर अपराधों के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। साथ ही सभी प्राप्त शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

पंजीबद्ध प्रकरणों का 60 एवं 90 दिनों के भीतर निपटारा अनिवार्य

थानों में लंबे समय से लंबित धोखाधड़ी के मामलों पर भी सख़्ती दिखाते हुए उन्होंने कहा कि एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निराकरण किया जाए। इसके अलावा नए प्रावधानों के तहत पंजीबद्ध प्रकरणों का 60 एवं 90 दिनों के भीतर निपटारा अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।

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