CG Prime News@रायपुर.Eight people from the Jain community took sannyas (renunciation) in Raipur छत्तीसगढ़ में जैन समाज के आठ लोगों ने सांसरिक जीवन त्याग कर सन्यास धारण कर लिया। रायपुर में माता-पिता के साथ 14 और 16 साल के दो बच्चों ने भी सन्यास लिया। वहीं 27 साल की युवती वल्र्ड टूर छोड़कर साध्वी बन गई। यह सभी जैन धर्म के मुमुक्ष बनने जा रहे हैं। गुरु ने सभी की परीक्षा ली। 18 घंटे नंगे पांव चलाकर देखा गया। इसके बाद मुमुक्ष बनने की अनुमति मिली।

माता-पिता और दो बच्चों ने लिया सन्यास, वर्ल्ड टूर छोड़कर साध्वी बनी सुरभि
14 और 16 साल के बच्चे भी बनेगें मुमुक्ष
आम्रपाली सोसायटी के रहने वाले आशीष सुराना (44) अपनी पत्नी रितु सुराना (42) अपने दोनों बच्चों आर्यन सुराना (16) और आरुष सुराना (14) के साथ मुमुक्ष बन रहे हैं। एक ही परिवार के चार सदस्य मुमुक्ष बनकर एक दूसरे से और अपने परिवार से हमेशा के लिए दूर चले जाएंगे। उनका आपस में सांसारिक रिश्ता पूरी तरह खत्म हो जाएगा
सच्चे मार्गदर्शन से सब संभव
गुरु योग तिलक सुरीश्वर ने कहा कि जैन धर्म जितना त्याग और तप शायद ही किसी दूसरे धर्म में हो। जब इसी तप को कोई अपना वास्तविक सुख मान ले तब उसे मुमुक्ष या मुक्ति पाने की इच्छा रखने वाला कहा जाता है। यह सब संभव होता है, एक सच्चे मार्गदर्शन से।
13 साल का तनिष भी बनेगा मुमुक्ष
रायपुर के दावड़ा कॉलोनी का रहने वाला 13 साल का तनिष सोनिगरा भी मुमुक्ष बनने वाला है। उनके पिता प्रमोद और माता शीतल सोनिगरा ने बताया कि तनिष दो बेटों में छोटा है। उसने धार्मिक स्थानों पर जाकर गुरुओ के संपर्क में रहा फिर खुद से कहा कि उसे दीक्षा लेनी है।
शुरुआत में मन नहीं माना। कोई भी मां-बाप यह कभी नहीं चाहेगा कि उसका बच्चा उससे दूर हो जाए। लेकिन जब तनिष झुकाव मोक्ष के रास्ते पर देखना तो हमने कठिन निर्णय लिया। तनिष कि माता ने बताया कि तनिष को रोटी सब्जी खाना पसंद नहीं था।
वह हर दिन नए-नए खाने की डिमांड करता था। उसे फिल्म देखने का भी शौक था, लेकिन मुमुक्ष बनने के बाद जीवन उसका पूरी तरह बदल जाएगा। उसने इस जीवन को खुद चुना है हम उसके धर्म के रास्ते जाने पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
