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धान से दलहन तक: आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं बिटावन बाई ध्रुव

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी से मिली आय से शिक्षा, दलहन उत्पादन और कर्जमुक्ति की ओर बढ़ीं धमतरी की महिला किसान

by cgprimenews.com
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आमदी गांव की किसान बिटावन बाई ध्रुव धान खरीदी केंद्र में

रायपुर। किसानों के हित में संचालित समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था आज भरोसे और पारदर्शिता की पहचान बन चुकी है। इस व्यवस्था की सफलता की जीवंत मिसाल हैं धमतरी जिले के आमदी गांव की किसान श्रीमती बिटावन बाई ध्रुव, जिनकी मेहनत और आत्मनिर्भर सोच ने उन्हें ग्रामीण विकास का प्रेरक उदाहरण बना दिया है।

मेहनत से लहलहाया साढ़े चार एकड़ खेत

बिटावन बाई ध्रुव ने अपने साढ़े चार एकड़ खेत में कड़ी मेहनत से धान की फसल तैयार की। इस वर्ष उन्होंने 92 क्विंटल धान का उत्पादन किया, जिसे वे आमदी स्थित सहकारी समिति में लेकर पहुंचीं। वहां उन्हें ऑफलाइन टोकन, समय पर तौल, बारदाना, छाया और पेयजल जैसी सभी सुविधाएं सुव्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई गईं।

पारदर्शी व्यवस्था से बढ़ा भरोसा

बिटावन बाई बताती हैं कि पहले धान बेचने को लेकर किसानों में असमंजस और चिंता रहती थी, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और किसान हितैषी हो गई है। समय पर खरीदी और भुगतान की व्यवस्था ने शासन-प्रशासन पर किसानों का भरोसा और मजबूत किया है।

धान से दलहन की ओर कदम

धान बिक्री से प्राप्त आय का एक बड़ा हिस्सा बिटावन बाई अब दलहन उत्पादन, विशेषकर चना फसल में निवेश कर रही हैं। इससे न केवल उनकी आय में विविधता आएगी, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी। इसके साथ ही वे पुराना कर्ज चुकाकर आर्थिक बोझ कम करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं।

शिक्षा और आत्मनिर्भरता का सपना

अपने परिवार के बारे में बताते हुए बिटावन बाई कहती हैं कि उनके दो बेटे, बहू और नाती-पोते हैं, और खेती ही परिवार की आजीविका का मुख्य साधन है। धान बिक्री से मिली राशि का उपयोग वे अपने नाती-पोतों की शिक्षा में करेंगी, ताकि आने वाली पीढ़ी शिक्षित और आत्मनिर्भर बन सके।

बिटावन बाई ध्रुव की यह कहानी दर्शाती है कि जब किसान-हितैषी नीतियां ज़मीन पर प्रभावी रूप से लागू होती हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होती है और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस कदम बढ़ते हैं।

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